'दूसरों के बारे में बात मत करो', काग्रेंस के साथ रिश्तों में आई खटास, भड़क उठे शशि थरूर
Congress Shashi-Tharoor Rift: कांग्रेस पार्टी सांसद शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच आईं दूरियां अब किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस पार्टी के सांसद के. मुरलीधरन ने शशि थरूर के बारे में "वह हमारे साथ नहीं हैं" बयान देकर कांग्रेस और शशि थरूर के बीच दरार को और बढा दी है। वहीं मंगलवार को शशि थरूर ने अपने आलोचकों को जवाब देते हुए ऐसा बयान दिया जिससे उनकी नाराजगी साफ नजर आ रही है।
दरअसल, के. मुरलीधरन, जो चार बार सांसद और दो बार विधायक रह चुके हैं, उन्होंने रविवार को कहा था कि शशि थरूर को राज्य में पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया पर अपनी टिप्पणी वापस नहीं ले लेते।

मुरलीधरन ने यह भी कहा था कि जब तक थरूर अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें तिरुवनंतपुरम में किसी भी पार्टी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने थरूर पर एक विवादास्पद सर्वेक्षण को लेकर भी निशाना साधा था, जिसमें दिखाया गया था कि थरूर अगले साल के चुनाव के बाद पिनाराई विजयन की जगह मुख्यमंत्री बनने के लिए 'पसंदीदा विकल्प' थे। कांग्रेस ने बाद में उस सर्वेक्षण को "मनगढ़ंत" बताया था।
"मुझसे दूसरों के बारे में बात मत करो",
वहीं मंगलवार को शशी थरूर ने कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान पर दिल्ली में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। थरूर ने कहा, "जो लोग ऐसे बयान दे रहे हैं, उनके पास इसका कोई आधार होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि वे लोग कौन हैं और उन्होंने यह भी कहा कि वह केवल अपने व्यवहार के बारे में बात कर सकते हैं, दूसरों के बारे में नहीं। इसलिए"मुझसे दूसरों के बारे में बात मत करिए।" शशि थरूर इस दौरान मुस्कुराते रहे लेकिन मुरलीधन के बयान पर उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी।
शशि थरूर और कांग्रेस के रिश्ते क्यों हुए तल्ख?
गौरतलब है कि शशि थरूर ने विकास को राजनीति और राजनीतिक दलों से ऊपर रखने की बात कही थी, जिसके बाद उनकी आलोचना हुई थी। उन्हें इमरजेंसी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में उनकी टिप्पणियों के लिए भी आलोचना झेलनी पड़ी थी, साथ ही पहलगाम हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करने के लिए भी। थरूर ने कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि उनका मानना है कि यह देश के लिए सही है।
गांधी परिवार के नेतृत्व पर सवाल उठाया था
2021 से शशि थरूर के कांग्रेस के साथ संबंध अनिश्चित रहे हैं, जब वह 'असंतुष्टों' के एक समूह जी-23 में शामिल हुए थे और चुनावों में हार के बाद गांधी परिवार के नेतृत्व पर सवाल उठाया था। पिछले कुछ महीनों में यह संबंध और भी खराब हो गया है।
कांग्रेस ने जताई थी नाराजगी
कांग्रेस ने मोदी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बारे में सकारात्मक टिप्पणियों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी, खासकर तब जब थरूर को पहलगाम हमले और भारत की सैन्य प्रतिक्रिया पर 'साझेदार देशों' को जानकारी देने के लिए कुछ विपक्षी सांसदों में से एक के रूप में चुना गया था।
बेनतीजा निकली राहुल और थरूर की मुलाकाल
थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेदों को स्वीकार कर चुके हैं। । उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात भी की, लेकिन उस मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकला। पिछले महीने एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने पार्टी के साथ किसी भी तरह के टकराव की बात को कम करके आंका था और ऐसी घटनाओं को "नेतृत्व के कुछ तत्वों के साथ राय का अंतर" बताया था।












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