क्या चल रही कांग्रेस हाई कमान से तकरार? बोले थरूर- 'वक्त आने दीजिए फिर बताता हूं'
Shashi Tharoor Congress Statement: 19 जून को वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद डॉ. शशि थरूर ने एक ऐसा बयान दिया जिसने न सिर्फ पार्टी के भीतर की खामोशी को तोड़ा, बल्कि राजनीति के गलियारों में कई सवाल भी खड़े कर दिए। अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के लिए पहचाने जाने वाले थरूर ने स्वीकार किया कि कांग्रेस नेतृत्व से उनके कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।
हालांकि वे उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं उठाना चाहते। थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में उनकी मोदी सरकार की कुछ नीतियों पर सकारात्मक टिप्पणियां और पार्टी के विपरीत रुख चर्चा में रही थी।

विशेष रूप से, केरल के निलांबूर उपचुनाव में प्रचार के लिए उन्हें आमंत्रित न किया जाना और नेतृत्व से संवाद की कमी ने इस दूरी को और स्पष्ट कर दिया है। थरूर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें कोई बुलावा नहीं आया, न ही कोई संवाद हुआ - यह संकेत है कि पार्टी के अंदर कुछ अनकहे तनाव गहराते जा रहे हैं।
निलांबूर उपचुनाव के लिए मुझे कॉल नहीं आया: Shashi Tharoor
कांग्रेस सांसद थरूर ने आगे स्पष्ट किया कि वे अधिकतर समय एक राजनयिक यात्रा पर बाहर थे, और जब वे भारत लौटे तो कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई निमंत्रण या संदेश उन्हें नहीं मिला। उन्होंने कहा, "मैं इस दौरान आधिकारिक कार्य पर विदेश में था। जब वापस आया, तो न कोई मिस कॉल आया और न ही कोई अनुरोध कि मैं चुनाव प्रचार में शामिल होऊं। मैंने इसे एक अवसर के रूप में लिया ताकि अपने पहले से तय कार्यक्रमों को पूरा कर सकूं।"
हालांकि थरूर ने साफ तौर पर यह भी कहा कि वे पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में लगातार लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं।
थरूर के इन कुछ बयानों के लेकर कांग्रेस में मचा हंगामा.....
"कांग्रेस के मूल्य ही मुझे पार्टी से जोड़े रखते हैं": शशि थरूर
थरूर ने यह भी साफ किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनका रिश्ता मजबूत है और वे पार्टी के सिद्धांतों से गहराई से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के जो संस्थागत मूल्य हैं, वही मुझे इस पार्टी में बनाए हुए हैं। मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मेरे संबंध बहुत ही मजबूत हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान पर बयान से कांग्रेस में असहजता
थरूर की इन टिप्पणियों से पहले उनके विदेश दौरों पर दिए गए बयानों ने भी कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर दिया था। पनामा में एक बहु-पक्षीय सांसद प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और सीमा पार सैन्य कार्रवाई को समर्थन देते हुए कहा था कि, "आतंकवादियों को अब यह स्पष्ट हो गया है कि उन्हें इसके लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। पहली बार जब भारत ने नियंत्रण रेखा को पार कर उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की, तो यह एक बड़ा बदलाव था।"
उन्होंने यह भी कहा, "कारगिल युद्ध के दौरान भारत ने LoC पार नहीं की थी। लेकिन 2019 के पुलवामा हमले के बाद भारत ने न केवल नियंत्रण रेखा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा को भी पार किया।"
डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर शशि थरूर की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए इस दावे पर कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम उनकी मध्यस्थता से हुआ। ट्रंप के इस बयान पर थरूर ने ब्राजील से जवाब देते हुए कहा, "हम अमेरिकी राष्ट्रपति पद का बहुत सम्मान करते हैं और उस सम्मान को ध्यान में रखते हुए बात करेंगे। लेकिन हमारी समझ इससे अलग है। हमें कोई यह कहने की जरूरत नहीं थी कि हमें रुकना चाहिए।"
"जब देश को मेरी ज़रूरत हो, मैं हमेशा तैयार हूं"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी हालिया मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि यह केवल सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से संबंधित मुद्दों पर थी और इसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब राष्ट्र से जुड़ा कोई मुद्दा उठता है, तो हमारा कर्तव्य है कि हम देश के साथ खड़े हों। जब भी देश को मेरी सेवा की आवश्यकता होगी, मैं हमेशा तैयार रहूंगा।"
कांग्रेस ने थरूर के बयानों पर जताई आपत्ति
कांग्रेस पार्टी के भीतर थरूर के इन बयानों को लेकर नाराजगी सामने आई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि थरूर के बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को राजनीतिक सहारा प्रदान कर सकते हैं, खासकर ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों के संदर्भ में। कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान भी कई सर्जिकल स्ट्राइक किए गए थे, लेकिन उन्हें प्रचारित नहीं किया गया था। इस दावे के समर्थन में पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का एक साक्षात्कार साझा किया।
शशि थरूर के इन बयानों ने कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान और मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। हालांकि वे अभी भी कांग्रेस के साथ अपनी निष्ठा और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहरा रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर संवाद की आवश्यकता और मतभेदों के समाधान की प्रक्रिया अब और अधिक जरूरी हो गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व और थरूर के बीच यह दरार सुलझती है या और गहराती है।मारी समझ इससे अलग है। हमें कोई यह कहने की जरूरत नहीं थी कि हमें रुकना चाहिए












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