जिस बिजनेस की PM मोदी ने की तारीफ, Shark Tank के 3 जजों ने उसे किया रिजेक्ट! पर OYO के मालिक ने खेला दांव
Shark Tank India 3: रियलिटी टेलीविजन शो शार्क टैंक इंडिया के तीसरे सीजन के 13वें एपिसोड में एक ऐसी स्टार्टअप कंपनी पिच करने आई, जिसकी तारीफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं।
शार्क टैंक इंडिया के 13वें एपिसोड में 'Daakroom' के नाम की एक स्टार्टअप आई। इसकी फाउंडर हरनेहमत और शिवानी अपना पिच लेकर आई थीं। ये स्टार्टअप अपने अभियानों और प्रोडक्ट के जरिए चिट्टी और लिखने की कला को बढ़ावा दे रही है।

इस स्टार्टअप की पीएम मोदी ने भी तारीफ की है लेकिन शार्क टैंक के ज्यादातर जजों को ये बिजनेस आइडिया ज्यादा पसंद नहीं आया। आइए जानतें इस स्टार्टअप के बारे में और क्यों शार्क को ये बिजनेस पसंद नहीं आया?
'डाक रूम' एक रचनात्मक और कला से जुड़ा स्टार्टअप है, जिसका मकसद पत्र लिखना और लिखने की कला को पुनर्जीवित करना है। शार्क इनका बिजनेस देख, इस बात से हैरान हैं कि यह जोड़ी संचार के डिजिटल मोड को कैसे चुनौती दे पाएगी। हालांकि हरनेहमत और शिवानी का मानना है कि लेटर में आपके इमोशन बहुत अच्छे से निकल कर आते हैं।
36 लाख रुपये थी डिमांड
अपने बिजनसे के बारे में बताने के बाद 'डाक रूम' के फाउंडर हरनेहमत और शिवानी ने अपनी कंपनी में 4% हिस्सेदारी के लिए 36 लाख रुपये की डिमांड की थी।
हरनेहमत और शिवानी ने अलग-अलग मशहूर हस्तियों की प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए अपनी योजनाओं और बिजनेस के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी को खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोत्साहित किया है। पीएम मोदी ने पत्र लिखकर 'डाक रूम' के प्रयासों की सराहना की और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्वीकार किया और युवा पीढ़ी को प्रेरित किया।
पीएम मोदी ने कहा है, ''हरनेहमत और शिवानी जी, बच्चों को पत्र लेखन के लिए प्रेरित करने की दिशा में आपका यह प्रयास सराहनीय है। लेटर राईटिंग कार्निवल में हिस्सा ले रहे सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को कार्यक्रम की सफलता और भविष्य के प्रयासों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।''
अमन गुप्ता ने कहा- 'ये कोई बिजनेस नहीं है...'
अमन गुप्ता ने पिच सुनने के बाद कहा, ''बहुत पुराने समय में ऐसा होता था। यह कोई बिजनेस नहीं है। फिलहाल मैं इससे बाहर हूं क्योंकि मुझमें आप लोगों जैसा लिखने का जुनून नहीं है, इसलिए मैं और इसमें कोई वैल्यू एड नहीं कर पाऊंगा।''
अमन गुप्ता के बाद राधिका गुप्ता ने भी कहा कि उन्हें भी नहीं लगता कि ये कोई बिजनेस है। पीयूष बंसल ने कहा, "मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि आपकी ओर से दी जाने वाली सर्विस असल में है क्या? आप रेवन्यू मॉडल क्या है? इसलिए मैं आपको सलाह दूंगा कि डाक रूम को एक स्टेशनरी ब्रांड में बदलने की कोशिश कीजिए।''
पीयूष बंसल के इस आइडिया से विनीता सिंह भी सहमत हो गईं। हालांकि विनीता सिंह ने भी उन्हें ऑफर दिया था लेकिन बात नहीं बनी।
OYO के फाउंडर ने डील की पक्की
OYO के फाउंडर रितेश अग्रवाल ने इनके साथ डील पक्की की। रितेश अग्रवाल ने इन्हें 6% हिस्सेदारी के बदले में 36 लाख रुपये दिए। हालांकि शर्त ये थी कि अगर वे अपने अनुमानित रेवन्यू को पूरा करते हैं, तो हिस्सेदारी 5% तक कम हो जाएगी।












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