मोदी सरकार ने चला ऐसा दांव, चक्रव्यूह में फंस गए अलगाववादी
नई दिल्ली। कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से जुड़े कुछ नेता अलगाववादी नेताओं से मिलने के लिए पहुंचे थे लेकिन अलगाववादी नेताओं ने उनसे मुलाकात नहीं की। यहां तक की इस टीम को गेट से ही वापस लौटना पड़ा और नारेबाजी का भी सामना करना पड़ा।

अलगाववादियों को लगा जोर झटका
अलगाववादी नेताओं के इस रवैये से केंद्र की मोदी सरकार खासी नाराज है। उन्होंने अलगाववादी नेताओं के व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए इसका इस्तेमाल खास रणनीतिक हथियार के तौर पर किया है।
अलगाववादियों के इस व्यवहार से वह पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक उनके रवैये से लोगों के बीच यही संदेश गया कि वह घाटी में हालात सामान्य नहीं होने देना चाहते हैं। उनके रवैये ने शांति प्रक्रिया की सरकार की कोशिशों के बीच उन्हें अलग खड़ा कर दिया है।
अलगाववादियों के रवैये ने सरकार को ये मौका जरूर दे दिया कि वह अलगाववादियों से अलग हटकर कश्मीर से जुड़े जरूरी फैसले ले सकें।
कुछ नेता अलगाववादी नेता गिलानी से मिलने पहुंचे थे
सरकार की ओर से ये मंशा नहीं थी कि प्रतिनिधिनमंडल अलगाववादी नेताओं से मिले। लेकिन सीताराम येचुरी, डी राजा समेत कुछ नेता अलगाववादी नेता सैयद अहमद शाह गिलानी से मिलने उनके घर पहुंच गए और सरकार ने उन्हें रोकने की कोशिश भी नहीं की।
हालांकि ये नेता अली शाह गिलानी से मुलाकात नहीं कर सके थे। बता दें कि कश्मीर में बिगड़े हालात के बीच अली शाह गिलानी समेत दूसरे अलगाववादी नेताओं को नजरबंद रखा गया है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सरकारी सूत्रों की ओर से कहा गया कि हम चाहते थे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
राजनाथ सिंह ने दौरे की जानकारी प्रधानमंत्री को दी
एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक ऑल पार्टी डेलिगेशन में शामिल कुछ नेता अलगाववादियों को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहते थे, लेकिन उन्हें ये साफ कर दिया गया कि कोई पार्टी या नेता पहल करके उनके पास जा सकते हैं लेकिन उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर का दौरा करके लौटे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राजनाथ सिंह कर रहे थे। उन्होंने पूरे दौरे की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी है।
इस बीच सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक दिल्ली में हुई। जिसमें कश्मीर की वर्तमान स्थिति को लेकर चर्चा की गई। साथ ही आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
कश्मीर मुद्दे पर महबूबा मुफ्ती और मोदी सरकार की रणनीति एक
हालांकि कश्मीर के ताजा हालात के मद्देनजर केंद्र की मोदी सरकार और जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार का रवैया एक है।
घाटी में हालात सुधारने के लिए वह लगातार कोशिशें कर रहे हैं। इस कोशिश के खिलाफ नजर आने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।












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