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कैसे सेला सुरंग ने उड़ाई चीन की नींद, अब LAC पर फौरन हथियार लेकर पहुंचेगी इंडियन आर्मी, जानें इसकी 10 खासियत

Sela Tunnel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में सेला टनल (सेला सुरंग) का उद्घाटन किया। सेला सुरंग के उद्घाटन ने चीन की नींद उड़ा दी है। सेला सुरंग 13 हजार फुट की ऊंचाई पर बना है और ये चीन के सीमा के एकदम पास है। 09 मार्च 2024 से ये सेला टनल चालू हो गया है।

सेला सुरंग के उद्घाटन के बाद अब भारतीय सेनाओं के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पहुंचना आसान हो गया है। सेला सुरंग के जरिए इंडियन आर्मी अब हर मौसम में चीन की सीमा से लगे तवांग तक आसानी से अपने हथियार और बाकी अन्य सामान ला जा सकती है।

Sela Tunnel

Sela Tunnel: सेला सुरंग ने कैसे बढ़ाई चीन की मुश्किलें

अब चीन की सीमा तक पहुंचना भारतीय जवानों के लिए बहुत आसान हो गया है। सेला सुरंग हर मौसम में कनेक्टिविटी सुविधा प्रदान करेगा। बारिश, गर्मी हो या सर्दी, हर मौसम में अरुणाचल प्रदेश के तवांग को ये टनल कनेक्टिविटी देगा।

सेला सुरंग चीन और भारत की सीमा पर अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों और मशीनरी की फौर तैनाती कर LAC पर भारतीय सेना की क्षमताओं को बढ़ाएगी। भारत द्वारा एलएसी के बेहद करीब सुरंग का निर्माण करना चीन के लिए टेंशन वाली बात है।

यही वजह है कि यह सुरंग रणनीतिक रूप से काफी अहम है। खासतौर से चीन की ओर सीमावर्ती इलाकों में बढ़ने निर्माण कार्यों के मद्देनजर इसे भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है। आम लोगों के लिए भी ये टनल एक वरदान की तरह है।

Sela Tunnel 10 Highlights: सेला सुरंग की 10 खास बातें?

  • 1. सेला सुरंग को बनाने में 825 करोड़ रुपये का खर्च आया है। यह दुनिया की सबसे लंबी ट्विन-लेन सुरंग है।
  • 2. सेला सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) ने किया है। इसका निर्माण नई ऑस्ट्रियाई टनलिंग पद्धति का इस्तेमाल कर बनाया गया है। ये टनल इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण है।
  • 3. सेला सुरंग को अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चारिदुआर-तवांग रोड पर सेला दर्रे के पार तवांग तक हर मौसम में कनेक्टिविटी देने के लिए बनाया गया है।
  • 4. सेला सुरंग में उच्चतम मानकों की सुरक्षा विशेषताएं भी हैं। यह परियोजना क्षेत्र में तेज और अधिक कुशल परिवहन के लिए जरूरी है। पीएम मोदी ने सेला सुरंग की आधारशिला फरवरी 2019 में रखी थी।
  • 5. सेला सुरंग 13 हजार फुट की ऊंचाई पर है। सेला सुरंग वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास है। सेला दर्रे के पास यह सुरंग बनाई गई है।
  • 6. सेला टनल से यात्रा शुरू होने पर तवांग की आवाजाही का समय पहले के मुकाबले 1 घंटा कम लगेगा।
  • 7. सेला सुरंग से हर दिन 3,000 कारें और 2,000 ट्रकों की आवाजाही आसानी से हो सकती है। ये गाड़ियां 80 किमी प्रति घंटा से रफ्तार भर सकते हैं।
  • 8. सेला सुरंग 1 की लंबाई 1,003 मीटर है और 1,595 मीटर लंबी दूसरी सुरंग है। ये दोनों ट्विन सुरंगें सेला के पश्चिम में 2 चोटियों से गुजरती है।
  • 9. सेला सुरंग प्रोजेक्ट में 8.6 किमी लंबी 2 सड़कें भी शामिल हैं।
  • 10. सेला सुरंग सिर्फ देश की रक्षा तैयारियों को ही बढ़ावा देने के लिए अहम नहीं माना जा रहा है, इससे यहां के रहने वाले लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

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