सीमा हैदर पर SIR प्रक्रिया का क्या होगा असर? नोएडा छोड़कर जाना होगा? क्या है नियम— अब वकील ने किया खुलासा
Seema Haider News: उत्तर प्रदेश में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR अभियान ने कई राज्यों के साथ-साथ यूपी में भी हलचल मचा रखी है। लेकिन इस बीच चर्चा उस महिला को लेकर भी है, जिसका मामला पिछले दो साल से देशभर में सुर्खियों में है। नाम है सीमा हैदर। लोग सोशल मीडिया से लेकर लोकल लेवल पर सवाल पूछ रहे हैं कि SIR का असर क्या सीमा हैदर पर भी पड़ेगा। क्या वह नोएडा छोड़ने पर मजबूर होंगी और क्या यूपी सरकार या CM योगी आदित्यनाथ उनकी किसी तरह मदद कर सकते हैं।
सवाल वाजिब है क्योंकि SIR प्रक्रिया का मकसद सभी मतदाताओं का डेटा वेरिफाई करना, डुप्लीकेट या संदिग्ध एंट्री हटाना और 2002 की वोटर लिस्ट के आधार पर नागरिकता के दावों की जांच करना है। जबकि सीमा हैदर का पूरा मामला ही नागरिकता और कानूनी स्थिति पर टिका है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि SIR उनके केस को कितना प्रभावित करेगा।

क्या सीमा हैदर पर SIR लागू होगा? वकील का बड़ा दावा
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सीमा हैदर के वकील एपी सिंह ने SIR वेरिफिकेशन को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि सीमा का मसला वोटर लिस्ट का नहीं बल्कि 'जीवनदान' का है। एपी सिंह के मुताबिक सीमा SIR के दायरे से ऊपर हैं क्योंकि यह मामला सीधे मानवीय आधार और राष्ट्रपति के पास लंबित याचिका से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में सहयोग नहीं कर रहा है, लेकिन इससे केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि सीमा कोई जासूस या आतंकी नहीं, बल्कि वह प्रेम के कारण भारत आई हैं। अगर कभी वह आतंकी निकलीं तो "डबल फांसी दे दीजिए।"
इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि उनका पक्ष SIR को सीमा के लिए गैर-चिंताजनक बता रहा है। लेकिन कानून क्या कहता है, यह भी समझना जरूरी है।
तो क्या SIR के कारण सीमा को नोएडा छोड़ना पड़ेगा?
साफ शब्दों में कहा जाए तो नहीं। SIR अभियान सिर्फ मतदाता सूची अपडेट करने और नागरिकता दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के लिए है। यह किसी भी व्यक्ति को घर छोड़ने या कहीं और जाने के लिए मजबूर नहीं करता। यह सिर्फ वोटर डेटा का सत्यापन है, न कि पुलिस या केंद्रीय एजेंसियों की नागरिकता जांच।
दूसरी बात सीमा खुद अवैध प्रवेश के केस में जमानत पर हैं और उनका मामला पहले से न्यायिक प्रक्रिया में है। इसलिए SIR उनके रहने, जाने, आने या लोकेशन को प्रभावित नहीं करता। हालांकि अगर सीमा ने कभी वोटर लिस्ट के लिए आवेदन किया हो, या किसी भारतीय पहचान दस्तावेज में नाम जुड़वाने की कोशिश की हो, तब SIR में सवाल जरूर उठ सकता है। लेकिन फिलहाल इस तरह का कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

राष्ट्रपति के पास लंबित है सीमा हैदर नागरिकता की याचिका
सीमा हैदर ने जुलाई 2023 में भारतीय नागरिकता के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई थी। यह याचिका अब भी लंबित है। एपी सिंह का दावा है कि यही असली मामला है और निर्णय यहीं से आएगा। SIR केवल वोटर डेटा अपडेट करता है, जबकि सीमा का मसला आर्टिकल 72 यानी राष्ट्रपति की विशेष शक्ति के तहत है। इसलिए यह दोनों प्रक्रियाएं आपस में जुड़ी नहीं हैं।
लेकिन विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार को सीमा के मसले में जल्द फैसला लेना चाहिए क्योंकि अवैध प्रवेश और सुरक्षा सवालों पर यह केस लंबे समय तक अनिर्णीत नहीं छोड़ना चाहिए।
क्या CM योगी आदित्यनाथ उनकी मदद कर सकते हैं?
सरकारी सिस्टम में SIR का काम चुनाव आयोग का है, जबकि नागरिकता और अवैध प्रवेश का मामला केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय देखता है।
ऐसे में CM योगी का सीधा हस्तक्षेप कानूनी तौर पर संभव नहीं है। हां, राज्य सरकार मानवीय आधार पर सुरक्षा, ठहराव या अन्य मदद के लिए कदम उठा सकती है, लेकिन नागरिकता देने या विदेश नीति से जुड़े फैसले यूपी सरकार नहीं ले सकती। इसलिए सोशल मीडिया पर जो चर्चाएं चल रही हैं कि "CM योगी सीमा को राहत दे देंगे", वे कानूनी प्रावधानों से मेल नहीं खातीं।
कौन हैं सीमा हैदर? पूरी कहानी
सीमा गुलाम हैदर एक पाकिस्तानी महिला हैं, जो मूल रूप से कराची की रहने वाली हैं। सीमा हैदर पाकिस्तानी मूल की महिला है। 2014 में पाकिस्तान में सीमा हैदर की शादी गुलाम हैदर से हुई थी। 2023 में PUBG खेलते-खेलते नोएडा के सचिन मीणा से ऑनलाइन प्यार हुआ। नेपाल में मिलने के बाद दोनों ने मंदिर में शादी करने का दावा किया।
सीमा अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते भारत आईं और ग्रेटर नोएडा में सचिन के साथ रहने लगीं। फिर हरियाणा के बल्लभगढ़ में दोनों को हिरासत में लिया गया सीमा को भारत में अवैध प्रवेश और फर्जी पहचान के आरोपों में गिरफ्तार किया गया, बाद में जमानत मिल गई। यही वह समय था जब फिल्म 'कराची टू नोएडा' का ऐलान हुआ, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी और सीमा की नागरिकता का मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा में बदल गया।











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