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4 बार हाथ आते-आते रह गए पहलगाम के आतंकी, एक बार तो सेना के साथ गोलीबारी भी हुई, आखिर कहां छिपे हैं?

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए 22 अप्रैल को आतंकी हमले के बाद से ही सेना घाटी में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन कर रही है। भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर पहलगाम के आसपास के जंगलों में घेराबंदी और तलाशी अभियान चला रही है। हमले में शामिल चार आतंकवादी, जिनमें दो पाकिस्तानी आतंकवादी भी शामिल हैं, उनको पकड़ने के लिए सुरक्षा बल दिन-रात लगे हुए हैं।

ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने पिछले पांच दिनों में अलग-अलग जगहों पर कम से कम चार बार पहलगाम के आतंकियों को खोज लिया था। लेकिन चारों बार ये हाथ आते-आते रह गए। एक बार तो सेना दक्षिण कश्मीर के जंगलों में उन्हें घेरने के बहुत करीब पहुंच गई थी। एक एक बार तो उनके साथ गोलीबारी भी हुई लेकिन वो हाथ नहीं आ पाए।

Pahalgam Terror Attack

सेना के अधिकारी बोले- ये बिल्ली और चूहे का खेल हो गया है

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी, खुफिया सूचनाओं और तलाशी अभियानों के जरिए आतंकवादियों का पता लगाया गया। सैन्य प्रतिष्ठान के एक अधिकारी ने कहा, ''यह बिल्ली और चूहे का खेल है। कई बार ऐसा हुआ है कि उन्हें आसानी से ढूंढ लिया गया। लेकिन जब तक उनको पकड़ा जाता, या मुठभेड़ की जाती, वे भाग जाते। जंगल बहुत घने हैं और किसी को आसानी से ढूंढ लेने के बाद भी उसका पीछा करना इन जंगलों में आसान नहीं है। लेकिन हमें यकीन है कि हम उन्हें पकड़ लेंगे, यह बस कुछ ही दिनों की बात है।"

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सबसे पहले पहलगाम के आतंकियों को अनंतनाग में देखा गया

सूत्रों के मुताबिक आतंकवादियों को पहले अनंतनाग के पहलगाम तहसील के हापत नार गांव के पास जंगलों में देखा गया था, लेकिन वे घने इलाके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। उसके बाद आतंकवादियों को कुलगाम के जंगलों में देखा गया, जहां उनके भागने से पहले उन्होंने सुरक्षा बलों के साथ गोलीबारी हुई।

उसके बाद आतंकियों के गिरोह को त्राल रिज और फिर कोकरनाग में देखा गया। सेना को शक है कि वो चारों आतंकी अभी इसी इलाकें में छिपे हैं। एक अधिकारी ने कहा, ''आम तौर पर, आतंकवादियों को भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है और तभी वे गांवों में पहुंचते हैं। कभी-कभी, वे जंगलों में भोजन की आपूर्ति के लिए अपने स्थानीय संपर्कों को बुला लेते हैं। इससे मानवीय खुफिया जानकारी मिलती है और सुरक्षा बलों को उन्हें घेरने का मौका मिल जाता है। हालांकि, ये आतंकवादी काफी सावधानी से काम कर रहे हैं।''

दक्षिण कश्मीर में छिपे हो सकते हैं पहलगाम के आतंकी

सेना के अधिकारियों के मुताबिक, "हमें एक घटना के बारे में पता चला है, जहां वे रात के खाने के समय एक गांव में गए, एक घर में घुसे और खाना लेकर भाग गए। जब ​​तक सुरक्षा बलों को सूचना मिली और वे वहां पहुंचे, तब तक काफी समय बीत चुका था और आतंकवादी भाग चुके थे।"

सूत्रों ने कहा कि एक और चुनौती यह है कि किश्तवाड़ रेंज, जो पहलगाम की ऊंची पहाड़ियों से जुड़ी हुई है, में इस मौसम में कम बर्फबारी हुई है। अधिकारी ने कहा,

"इससे आतंकवादियों को रेंज का इस्तेमाल करके जम्मू की तरफ जाने का विकल्प मिल जाता है, जहां जंगल घने हो सकते हैं और इलाके से निपटना मुश्किल हो सकता है। वे इधर-उधर जाने के लिए किश्तवाड़ रेंज का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अभी तक हमारा मानना ​​है कि वे अभी भी दक्षिण कश्मीर में हैं।"

सूत्रों ने कहा, आतंकवादियों ने बैसरन में मारे गए पर्यटकों के दो मोबाइल फो छीन लिए हैं। उम्मीद है कि इन फोन का इस्तेमाल स्थानीय और सीमा पार संचार स्थापित करने के लिए किया जाएगा। तकनीकी खुफिया नेटवर्क संभावित सुराग के लिए इन फोन की जांच कर रहा है।

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