क्या SCO आतंकवाद पर निष्पक्ष है? शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में आखिर क्यों भड़का भारत?

SCO Summit: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के हाल ही में हुए सम्मेलन में भारत ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए संयुक्त घोषणा-पत्र (Joint Declaration) पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। भारत ने इस कदम के पीछे आतंकवाद पर संगठन के कथित पक्षपाती रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।

सूत्रों के अनुसार, भारत इस बात से असंतुष्ट था कि संयुक्त दस्तावेज़ में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जबकि इसमें पाकिस्तान में हुई कुछ घटनाओं का जिक्र किया गया था। भारत ने इसे दोहरे मापदंड बताते हुए दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

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क्या है पूरा मामला? What is the whole matter?

SCO सम्मेलन में सदस्य देशों द्वारा एक संयुक्त घोषणा-पत्र तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाना था। हालांकि, जब भारत ने उस दस्तावेज़ की समीक्षा की, तो उसे उसमें पक्षपातपूर्ण भाषा और असंतुलन दिखाई दिया।

भारत के मुताबिक, दस्तावेज़ में पाकिस्तान में हुए आतंकी घटनाओं का ज़िक्र तो किया गया था, लेकिन हाल ही में अमरनाथ यात्रा के लिए जा रहे यात्रियों पर पहलगाम में हुए आतंकी हमले को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। इस हमले में सुरक्षाबलों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया था।

भारत का विरोध और कूटनीतिक संदेश

भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इसे किसी एक देश के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सूत्रों के अनुसार, भारत का कहना था, "जब तक सभी आतंकी घटनाओं को निष्पक्षता से नहीं उठाया जाएगा, तब तक आतंकवाद के खिलाफ किसी भी साझा प्रयास का कोई अर्थ नहीं रह जाता।"

भारत ने यह भी बताया कि पक्षपातपूर्ण बयानबाजी और राजनीतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक लड़ाई को कमजोर करता है। इसी कारण न केवल भारत ने संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, बल्कि संयुक्त संवाद (Joint Communique) भी जारी नहीं हो सका।

गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाकर किया गया हमला न केवल धार्मिक यात्रा पर हमला था, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा प्रहार भी था। ऐसे में भारत ने अपेक्षा की थी कि SCO जैसे मंच पर इस घटना की भी कड़ी निंदा की जाएगी।

SCO में भारत की भूमिका और महत्व

भारत शंघाई सहयोग संगठन का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। यह संगठन सुरक्षा, आर्थिक विकास, ऊर्जा सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति के लिए स्थापित किया गया था। भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और SCO मंच का उपयोग भी इसी दिशा में किया है।

हालांकि, भारत का मानना है कि आतंकवाद को लेकर निष्पक्षता और समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए, न कि केवल राजनीतिक या रणनीतिक लाभ के लिए कुछ घटनाओं को महत्व दिया जाए और कुछ को नज़रअंदाज़ किया जाए।

क्या होगा अगला कदम?

भारत के इस निर्णय ने SCO में सदस्य देशों के बीच विचारधारा के अंतर को उजागर कर दिया है। आने वाले समय में भारत द्वारा इस मुद्दे को और अधिक प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद पर 'सेलेक्टिव साइलेंस' अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारत का यह रुख यह दर्शाता है कि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ और सख्त नीति अपनाने का समय आ गया है। यदि वैश्विक मंच आतंकवाद पर एकजुट होकर निष्पक्ष नहीं हो सकते, तो ऐसे साझा प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाज़मी है। SCO जैसे संगठनों को भी अब यह समझना होगा कि सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि ईमानदारी और निष्पक्षता ही सबसे महत्वपूर्ण है।

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