वैक्सीन का विकल्प तलाशने में लगे वैज्ञानिक, एंटीबॉडी नेजल स्प्रे के जरिए होगा कोरोना का इलाज- स्टडी
नई दिल्ली, जून 7। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट ने जो तीसरी लहर की संभावना जताई है, उसने सरकारों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। तीसरी लहर की दस्तक से पहले सरकार की कोशिश ये है कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगा दी जाए, लेकिन वैक्सीन की सप्लाई और प्रोडक्शन में कमी की वजह से वैज्ञानिक वैक्सीन के विकल्प को बनाने के तरीके तलाश रहे हैं।

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संक्रमण पर प्रभावी दिखा नेजल स्प्रे
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, वैज्ञानिक कोविड -19 वैक्सीन के नए विकल्प बनाने के तरीके खोज रहे हैं। इन तरीकों में एंटीबॉडी नेज़ल स्प्रे का विकल्प भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने एक हाइब्रिड इंजीनियर्ड एंटीबॉडी बनाया है, जिसने संक्रमित चूहों के फेफड़ों में SARS-CoV-2 की मात्रा को कम किया। नेचर जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, एंटीबॉडी नेजल स्प्रे चूहों में कोरोना वायरस के विभिन्न वेरिएंट के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हुए पाया गया है। ये स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास हेल्थ साइंस सेंटर के एक एंटीबॉडी इंजीनियर झिकियांग कू के नेतृत्व में की गई है। उनके नेतृत्व में काम करने वाली टीम का कहना है कि इस स्प्रे को सीधे नाक के जरिए फेफड़ों तक पहुंचाया जा सकेगा।
वायरस के 20 से अधिक स्ट्रेन पर दिखा असर
एंटीबॉडी विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम ने एंटीबॉली लैब में अध्ययन किया और पाया कि इंजीनियर्ड एंटीबॉडी SARS-CoV-2 के उस घटक इम्युनोग्लोबुलिन एम (IgM) को पहचानने में सक्षम थी, जो कोशिकाओं के अंदर चिपककर वायरस को शरीर में प्रवेश की अनुमति देता है। रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम ने SARS-CoV-2 को लक्षित करने वाले IgG के टुकड़ों को एक अलग प्रकार के अणु IgM एंटीबॉडी से जोड़ दिया, जो संक्रमण की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए तेजी से प्रसार के लिए पहला जिम्मेदार फैक्टर है। इंजीनियर्ड एंटीबॉडी में कोरोना वायरस के 20 से अधिक स्ट्रेनों के प्रभाव को बेअसर करने की शक्ति नजर आई है।












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