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ये कैसा संयोग! 370 की बरसी पर गई 370 हटाने वाले गवर्नर की जान, सत्यपाल मलिक का ऐतिहासिक दिन निधन!

Satyapal Malik Death: पूर्व जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार (05 अगस्त) को निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि उनके आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर की गई है। सत्यपाल मलिक लंबे समय से बीमार चल रहे थे और नई दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

यह एक खास संयोग है कि जिस तारीख को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, उसी दिन सत्यपाल मलिक ने भी इस दुनिया को अलविदा कहा। सत्यपाल मलिक ने 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। इसी दौरान 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - में विभाजित किया गया, जिससे भारत के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव दर्ज हुआ।

Satyapal Malik Death

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि ये कैसा संयोग है, 370 की बरसी पर गई 370 हटाने वाले गवर्नर की जान। कई लोगों ने लिखा है कि , सत्यपाल मलिक का निधन ऐतिहासिक दिन हुआ है। अब 5 अगस्त को दो बड़ी घटनाओं के लिए याद किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में उनका कार्यकाल आर्टिकल 370 हटाने के वक्त चर्चा में भी आया था। उन्होंने बाद में कहा था कि इस फैसले से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई थी और गृह मंत्री (अमित शाह) ने उन्हें सिर्फ एक दिन पहले इसकी जानकारी दी थी।

सत्यपाल मलिक के निधन की वजह!

अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सत्यपाल मलिक डायबेटिक किडनी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और स्लीप एपनिया जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित थे। उन्हें 11 मई 2025 को कॉम्प्लिकेटेड यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बाद में सेप्टिक शॉक, निमोनिया और मल्टी-ऑर्गन फेलियर की स्थिति पैदा हो गई।

सत्यपाल मलिक का पार्थिव शरीर आर के पुरम स्थित उनके आवास ले जाया जाएगा और लोदी शवदाह गृह में कल अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सत्यपाल मलिक राजनीतिक सफर

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक करियर लगभग 50 वर्षों का रहा। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत से ताल्लुक रखते थे और अपने करियर की शुरुआत 1970 के दशक में चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल से की थी।

1980 में वह लोक दल के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे। फिर 1984 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की और 1986 में कांग्रेस की ओर से दोबारा राज्यसभा भेजे गए। सत्यपाल मलिक ने बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

सत्यपाल मलिक विवादों से भी रहा नाता

सत्यपाल मलिक को उनके बोल्ड और बेबाक बयानों के लिए जाना जाता था। वह कई बार केंद्र सरकार के लिए असहज स्थिति भी पैदा कर चुके थे। उन्होंने 2019 के पुलवामा हमले और भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वे फिर से सक्रिय राजनीति में आने की कोशिश कर रहे थे और जाट एवं किसान समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे।

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