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खाप ने खत्‍म की 650 वर्ष पुरानी परंपरा, अब गांव-पड़ोस-गोत्र छोड़ कहीं भी कर सकेंगे शादी

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Khap to decide on 650-year-old tradition of no marriages in neighbouring villages
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। 650 सालों से चली आ रही परम्‍परा ने आखिरकार प्‍यार करने वालों के सामने घुटने टेक दिया। जी हां 650 साल पुरानी अपनी परंपरा को बदलते हुए सतरोल खाप ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जातीय बंधन को खत्म करने का फैसले किया है। खाप ने कहा है कि लोग अपनी गांव, गोत्र और पड़ोसी गांव को छोड़कर कहीं भी विवाह कर सकते हैं। पंचायत ने वहां मौजूद लोगों के सामने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। हालांकि कुछ लोगों ने इस फैसले का विरोध किया और बीच में ही महापंचायत से उठकर चले गये।

फैसला लेने से पहले खाप के अनेक मौजिज लोगों ने अपनी राय रखी। सबसे पहले खाप के प्रधान इंद्र सिंह ने कहा कि हम सतरोल खाप को तोड़ नहीं रहे हैं बल्कि रिश्‍ते नातों के बंधन को खोल रहे हैं। इसके बाद ऋषि राजपुरा ने कहा कि पंचायत से लोकसभा बनी थी, लोकसभा से पंचायत नहीं बनी। हमारे बुजुर्ग जैसा भाईचारा हमें देकर गए थे, हमें उनकी विरासत को बचाते हुए इस संभालकर रखना चाहिए। खाप में आने वाले गांवों की आपस में रिश्‍तेदारी ठीक नहीं रहेगी। प्रधान ने कहा कि भाईचारा सुख दुख के लिए बनाया गया है और हमें इस पर कायम रहना चाहिए।

गांव स्तर पर कमेटी का गठन करना चाहिए। रिश्ते नाते होने से भाईचारा कमजोर नहीं, बल्कि ओर भी मजबूत होगा। वहीं इस परम्परा को तोड़ने की सबसे बड़ी वजह बताइ गई कि प्रदेश में लड़कियों की संख्या दिनों-दिन कम होती जा रही है, इसलिए लड़कों की शादियों में दिक्कतें आ रही हैं। दूसरी तरफ इन 42 गांवों में भाईचारा होने के कारण विवाह नहीं हो पाते थे, जिस कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब पंचायत ने कुछ शर्तों के साथ ये बंधन तोड़ दिए हैं तो बहुत से लोग इससे खुश नज़र आ रहा है।

उल्‍लेखनीय है कि अभी तक खाप के 42 गांवों में रिश्ता नहीं हो सकता था। इन गांवों में खाप के अनुसार भाईचारा माना जाता था। हरियाणा में परंपरा के नाम पर खाप पंचायतें अंतर जातीय विवाह, समान गोत्र में विवाह और एक ही गांव में शादी का विरोध करती है। सम्मान के नाम पर प्रेमी युगल की हत्या तक कर दी जाती है।

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English summary

 Their antagonism to same-gotra marriages has earned them flak from all quarters. Now, in what could shatter the 650-year-old tradition, the Satrol khap panchayat of Haryana is mulling to ease out marriage norms in the 42 villages falling under its jurisdiction.
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