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सर्वणा भवन के राजगोपाल कैसे बने 'डोसा किंग', क्यों हुआ पतन और क्या है बदनाम इतिहास, जानिए

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नई दिल्ली- साउथ इंडिया के सबसे बड़े होटल चेन सर्वणा भवन के संस्थापक पी राजगोपाल ने गुरुवार को चेन्नई में दम तोड़ दिया। 72 साल के राजगोपाल को 2001 के प्रिंस सांताकुमार के अपहरण और हत्या के केस में उम्र कैद की सजा मिली थी। उसे पिछले 9 जुलाई को ही मजबूरन सरेंडर करना पड़ा था। आइए जानते हैं कि कैसे शून्य से शिखर पर पहुंचने के बाद हुआ डोसा किंग का पतन और क्या है उसके पतन के पीछे का बदनाम इतिहास?

कैसे बना 'डोसा किंग'

कैसे बना 'डोसा किंग'

तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के पुननैइडी में एक बेहद गरीब किसान परिवार में पैदा हुआ पी राजगोपाल बहुत छोटी सी उम्र में ही चेन्नई चला गया। उसने बसों और होटलों में टेबलों की सफाई से अपना करियर शुरू किया। 1968 में उसने चेन्नई के ही केके नगर (तब बाहरी इलाके में होता था) में एक छोटा सा किराना का शॉप खोला। कुछ दिनों बाद ही उसने कमाची भवन नाम का बंद होने वाला एक रेस्टोरेंट खरीद लिया और उसे नया नाम और नया लुक दिया। उसे बचपन से ही एस्ट्रोलोजी में बहुत ज्यादा यकीन था और 1981 में जब उसने अपने होटल कारोबार को एक नई धार दी, तो उसके पीछे भी एक एस्ट्रोलजर की ही सलाह काम आई थी। यहीं से सर्वणा भवन की नींव पड़ी। बहुत कम समय में सस्ते दाम में इडली, डोसा-सांबर और चटनी ने उसके होटल की लोकप्रियता को दुनियाभर में मशहूर कर दिया। न्यूज मिनट की एक खबर के मुताबिक सर्वणा भवन के एक प्रतिद्वंद्वी मुरुगन इडली के मनोहरन ने न्यू यॉर्क टाइम्स से कहा था कि, "उन्होंने वेजिटेरियन बिजनेस को प्रतिष्ठा दिलाई। उन्होंने क्रांति ला दी।"

वेजिटेरियन बिजनेस को नई ऊंचाई पर पहुंचाया

वेजिटेरियन बिजनेस को नई ऊंचाई पर पहुंचाया

जब सर्वणा भवन ने वेजिटेरियन बिजनेस कारोबार में कदम रखा था, तब दक्षिण भारत में इस कारोबार में ब्राह्मण रसोइयों का ही बोलबाला होता था। उस समय लोग घर से बाहर खाने में हिचकते थे। यह उनकी आदतों में शामिल ही नहीं था। उस स्थिति में नादर समुदाय से आने वाले राजगोपाल ने खुद को मिडिल क्लास के लोगों को शाकाहारी साउथ इंडियन खाने का ऐसा स्वाद चखाया कि जिसने भी कभी एक बार चखा, वह भूलने के लिए तैयार नहीं हुआ। धीरे-धीरे अपने कारोबार को उसने उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया कि कई परिवारों को उससे बड़ा सोचने का हौसला मिल गया। तमिलनाडु में पोथिज, सर्वणा स्टोर्स की कामयाबियों के पीछे भी सर्वणा भवन की सफलता ही जुड़ी है। 1981 से 2019 के चार दशकों में सर्वणा भवन ने दक्षिण भारत में रेस्टोरेंट कारोबार को एक नई पहचान दिलाई और लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई से लेकर थाईलैंड तक में 80 से ज्यादा फ्रेंचाइजी आउटलेट खोलने में कामयाबी हासिल की। उसका भारत के बाहर पहला रेस्टोरेंट 2000 में दुबई में खुला और इस समय अकेले चेन्नई में 20 रेस्टोरेंट चल रहे हैं। उसने दुनियाभर में रहने वाले भारतीयों को कम दाम पर इडली, डोसा, वड़ा और कॉफी में घर का स्वाद देकर उनके वहां के जीवन में नई मिठास घोलने का काम किया, इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती।

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अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा 'अन्नाची' रहा राजगोपाल

अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा 'अन्नाची' रहा राजगोपाल

सर्वणा भवन के कर्मचारियों को राजगोपाल ऐसी सुविधाएं देता था, जिसपर न्यू यॉर्क टाइम्स तक में लेख छप चुके हैं। 2014 के न्यू यॉर्क टाइम्स के एक लेख के मुताबिक अपने कर्मचारियों के साथ उसका व्यवहार परिवार के सदस्यों जैसा था। उसके कर्मचारी अपने अन्नाची (बड़े भाई) के लिए हमेशा समर्पित रहे। इसका असर उनके काम पर भी पड़ता रहा और वे अपने घर के काम की तरह सेवाएं देते रहे हैं। अगर विदेशों में सर्वणा भवन में काम करने वाले कर्मचारी भारत में अपने घर भी आते थे, तो वे निश्चिंत भाव से छुट्टियां मनाकर वापस लौटते थे। क्योंकि, अन्नाची के यहां उनकी नौकरी सुरक्षित थी।

एस्ट्रोलोजी से बना और उसी के चक्कर में बर्बाद हो गया

एस्ट्रोलोजी से बना और उसी के चक्कर में बर्बाद हो गया

पी राजगोपाल ने दो-दो शादियां कीं, लेकिन दोनों कामयाब नहीं हुई। पहली शादी से दो बच्चे भी हुए शिव कुमार और सर्वणनन। दूसरी शादी अपने एक कर्मचारी की ही पत्नी से की। लेकिन, उसकी चाहत कभी खत्म नहीं हुई। 1999 में उसकी नजर एक कर्मचारी की बेटी जीवाज्योति पर पड़ गई। एक एस्ट्रोलजर ने उससे कहा कि अगर जीवाज्योति को पत्नी बना ले, तो उसका भाग्य और चमक उठेगा। लेकिन, जीवाज्योति इसके लिए तैयार नहीं थी। उसने राजगोपाल के प्रस्ताव को ठुकराकर अपने प्रेमी प्रिंस सांताकुमार से शादी कर ली। राजगोपाल को यह कबूल नहीं था। 2001 में जीवाज्योति, उसका पति सांताकुमार अपने परिवार के साथ तिरुचेंदुर जा रहे थे कि रास्ते से ही सांताकुमार को अगवा कर लिया गया। कुछ दिनों बाद उसकी डेड बॉडी कोडाइकनाल से बरामद हुई। उसकी मौत दम घुटने से हुई थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मार्च में हाई कोर्ट से मिली उसकी सजा पर मुहर लगा दी थी। पिछले 9 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने उसकी सारी अपील वाली याचिकाएं खारिज कर दीं और सरेंडर करने को मजबूर कर दिया था और 19 जुलाई को उसने एक सजायाफ्ता मुजरिम के तौर पर ही हार्ट अटैक से दम तोड़ा।

हत्या के आरोप के बावजूद भी बढ़ता रहा बिजनेस

हत्या के आरोप के बावजूद भी बढ़ता रहा बिजनेस

राजगोपाल की जिंदगी में उतार-चढ़ाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब उसके दिमाग में जीवाज्योति के पति की हत्या की प्लानिंग चल रही थी, लगभग उसी दौरान वो भारत से बाहर दुबई में अपना रेस्टोरेंट खोलने की योजना भी बना रहा था। जब, इस हत्याकांड में 2003 में उसे पहली बार जेल जाना पड़ा तब कनाडा, ओमान और मलेशिया में सर्वणा भवन के नए ब्रांच खुल रहे थे। उसने बाहरी दुनिया के लोगों के लिए अपनी छवि इस तरह बना रखी थी कि पी राजगोपाल और सर्वणा भवन एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए। लोग समझने लगे कि उसका होटल चेन कमाई से ज्यादा लोगों को सस्ती कीमत पर घर जैसे खाना मुहैया कराने के लिए खोला गया है। लेकिन, राजगोपाल जैसी शख्सियत में एक और राजगोपाल छिपा बैठा था, जो प्रिंस सांताकुमार का कातिल था, जिसके बारे में बाहर के लोग उतनी गहराई से नहीं परख पाए थे।

अपने किये पर कभी पछतावा नहीं किया

अपने किये पर कभी पछतावा नहीं किया

भारत की सर्वोच्च अदालत ने उसे हत्या का दोषी मानते हुए ताउम्र जेल की सजा काटने का हुक्म दिया, लेकिन राजगोपाल को कभी भी अपनी धिनौनी करतूत पर पछतावा नहीं हुआ। एक बार न्यू यॉर्क टाइम्स ने उससे इस हत्याकांड के बारे में सवाल किया, तो उसने कहा, "मैं अपने भगवान की प्रार्थना करता रहता हूं, किसी दूसरे की गलती की सजा मुझे क्यों मिलेगी?" लेकिन, इसी इंटरव्यू में एक बार उसकी जुबान फिसल गई और उसने जीवाज्योति का नाम ले लिया। सवाल था कि उसे अपने काम में क्या पसंद नहीं आता है, तो उसने जवाब दिया, "मुझे कर्मचारियों का शराब पीना और पड़े रहना पसंद नहीं है। अगर आप मुझसे पूछेंगे, तो जीवाज्योति के बाद मुझे ये सब पसंद नहीं है।" तभी एक कर्मचारी ने उसे टोका और बात को सहेजने की कोशिश शुरू कर दी।

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English summary
Saravana Bhawan owner P Rajagopal passed away with a heart attack
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