धार्मिक केंद्रों में लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी पर बोले संजय राउत - महाराष्ट्र में पहले से है ये नियम
बेंगलुरू, 07 अप्रैल : मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने दो दिन पहले मस्जिद में बजने वाले लाउस्पीकर को बंद कराने का मुद्दा उठाकर देश भर में नई बहस छेड़ दी है। वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार के पास पहले से ही एक नियम है जो लाउडस्पीकर के माध्यम से अजान के डेसिबल स्तर को निर्धारित करता है। ।

महाराष्ट्र में अज़ान को लेकर चल रहे विवाद की आग कर्नाटक तक पहुंच चुकी है। जिसको संज्ञान में लेते हुए शिवसेना सांसद ने कहा महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय के पास अज़ान के दौरान डेसीबल स्तर क्या होना चाहिए, इस पर एक दिशानिर्देश है
बता दें बेंगलुरु पुलिस ने गुरुवार को मस्जिदों, मंदिरों, चर्चों, पबों, बारों समेत 300 से अधिक प्रतिष्ठानों को अपने लाउडस्पीकरों का उपयोग निर्धारित डेसिबल स्तर के साथ ही लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने को कहा है। इसके संबंध में नोटिस भेजा गया है। कर्नाटक पुलिस आयुक्त कमल पंत ने ये जानकारी दी।
गौरतलब है कि कुछ दक्षिण-पंथी संगठनों द्वारा मस्जिदों में तेज आवाज में चलने वाले लाउडस्पीकर बंद करवाए जाने संबंधी अभियान की शुरुआत के बाद कर्नाटक पुलिस ने यह कदम उठाया है। ये मांग करने वाले संगठनों ने दावा किया है ऐसे लाउडस्पीकर के उपयोग से आसपास रहने वाले लोगों को दिक्कत होती है।
वहीं दो दिन पहले कर्नाटक के वरिष्ठ मंत्री ईश्वरप्पा ने भी कहा था इससे छात्रों और मरीजों को दिक्कत होती है और इसके संबंध में कई शिकायतें भी मिल चुकी हैं।
पिछले हफ्ते, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने उस समय हंगामा खड़ा कर दिया जब उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता महाराष्ट्र में मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा लाउडस्पीकर लगाकर गाएंगे। यह एक केवल एक चेतावनी नहीं थी, ठाणे में मनसे कार्यकर्ताओं ने कल्याण शहर में अपने कार्यालय के सामने हनुमान चालीसा पढ़ी।
राज ठाकरे ने कहा था मस्जिदों में लाउडस्पीकर इतनी तेज आवाज में क्यों बजाया जाता है? यदि इसे नहीं रोका गया, तो मस्जिदों के बाहर अधिक मात्रा में हनुमान चालीसा बजाने वाले वक्ता होंगे, "राज ठाकरे ने यह पूछते हुए कहा कि क्या धर्म की स्थापना के समय लाउडस्पीकर थे।












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