Same Sex Marriage: समलैंगिक विवाह को लेकर केंद्र और SC के बीच तीखी बहस, पढ़िए अहम दलीलें
Same Sex Marriage: सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस बीच केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तीखी बहस देखने को मिली है।
Same Sex Marraige: सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने को लेकर बहस हो रही है। आज बहस का दूसरा दिन है। केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पांच जजों की बेंच के सामने दलील रख रहे हैं। बता दें कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए 20 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दा

इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल से शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं। इस लेख में आप सुप्रीम कोर्ट और केंद्र के बीच बहस के मुख्य अंश को पढ़ सकते हैं
केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने सराहा
आज सुनवाई से पहले तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि हमने समलैंगिक विवाह को लेकर सभी राज्यों को पत्र लिखा है और उनसे इसपर राय मांगी है। सीजेआई ने केंद्र सरकार के इस रुख की तारीफ की। अगर कोई भी इसमे अपनी राय रखना चाहता है तो उन्हें पता है कि इस मामले की सुनवाई चल रही है।
30 दिन की नोटिस की शर्त असंवैधानिक
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ जोकि पांच जजों की बेंच के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने समलैंगिक विवाह के लिए कपल को 30 दिन पहले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नोटिस देने को अनिवार्य किए जाने को असंवैधानिक करार दिया था।
संबंध को समाज स्वीकार करता है, जजमेंट या कानून नहीं
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि किसी भी संबंध को समाज में स्वीकार किए जाने के लिए किसी कानून या जजमेंट की जरूरत नहीं होती है। विधायिका का हमेशा से मकसद बायोलॉजिकल पुरुष और बायोलॉजिकल महिला के बीच संबंध को लेकर रहा है।
सुनवाई पर उठाया सवाल
यही नहीं तुषार मेहता ने यह भी कहा कि क्या न्यायपालिका इसके लिए सही मंच है कि समाज में विवाह के जरिए सामाजिक कानूनी अधिकार दिया जाए। यही नहीं याचिकाकर्ता इस देश के विचारों का प्रतनिधित्व नहीं करते हैं। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि यहां के इंचार्ज हम हैं, लिहाजा हम ही यह तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई करनी है या नहीं।
महिला-पुरुष के बीच का भेद
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि बॉयोलॉजिकल महिला या बॉयोलॉजिकल पुरुष के बीच भेज करने के लिए यह कोई पुख्ता विचार नहीं है। ना ही यह सिर्फ जननांग से जुड़ा एक सवाल है। यह काफी जटिल है कि किसी को सिर्फ उसके जननांग के आधार पर परिभाषित किया जाए। इसपर तुषार मेहता ने कहा कि निसंदेह यह किसी के जननांग से जुड़ा सवाल है क्योंकि इसी से यह तय होता है कि वह व्यक्ति पुरुष है या महिला।
यहां देखिए सुनवाई Live












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