'बेहतर अर्थव्यवस्था के लिए जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाना चाहिए'
नई दिल्ली। महिला सशक्तिकरण पर संवाद ग्रुप द्वारा आयोजित 'ओडिशा-50' वेबिनार में मिशन शक्ति की निदेशक सुजाता कार्तिकेयन ने कहा कि, महिलाएं अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बाबजूद भी वह गरीबी का सामना करती हैं, जो उनके लिए एक बड़ी बाधा है। हमें उन्हें आगे लाने के तरीकों को विकसित करना चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर नेतृत्व को बढ़ावा मिले। फिक्की और खिमजी फाउंडेशन भी इस वेबिनार का हिस्सा थे।

संवाद ग्रुप द्वारा आयोजित इस वेबिनार में कई नौकरशाहों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे। संवाद ग्रुप और फिक्की की भूमिका की सराहना करते हुए कार्तिकेयन ने कहा कि, चाहे महिला सशक्तिकरण हो या अन्य मुद्दे, सरकार अकेले उन्हें हल नहीं कर सकती। इसके लिए हमें समान विचारधारा वाले व्यक्तियों, संस्थानों या संगठनों को एक साथ लाने की आवश्यकता है। अन्य राज्यों में शुरू किए गए समान कार्यक्रमों की तुलना में मिशन शक्ति की विशिष्टता के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि प्राथमिक उद्देश्य जमीनी स्तर पर महिलाओं के बीच नेतृत्व को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि कोविड -19 महामारी के दौरान, महिला स्वंय सहायता समूह अपने दम पर आगे आए। महिला ने लोगों को कोरोना के दौरान मानक व्यवहार का पालन करने और हाथ की स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता पैदा की। इसके अलावा, स्वंय सहायता समूह द्वारा 70 लाख से अधिक मास्क का उत्पादन किया गया है। उन्होंने सीएम रिलीफ फंड को दान भी दिया। उन्होंने कहा कि स्वंय सहायता समूह की महिलाओं को बैंकिंग संवाददाताओं के रूप में नियुक्त किया है ताकि वे अन्य महिलाओं को बैंकिंग में मदद कर सकें। इस मार्च तक, हमने 500 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है।
जाने-माने अर्थशास्त्री और केआईआईटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन प्रो डॉ एसएन मिश्रा ने इस अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि, हमें लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता के रुझानों के बारे में पता होना चाहिए। मानव विकास रिपोर्ट 2020 के अनुसार, पुरुष समकक्षों की तुलना में बाजार में महिला कर्मचारियों की भागीदारी बहुत कम है, यानी 23.5 प्रतिशत है। अगर हम चीन से इसकी तुलना करें तो पुरुषों के 67 प्रतिशत की तुलना में महिलाएं 60 प्रतिशत हैं। कुल मिलाकर, भारत में महिला भागीदारी बहुत कम है। यदि आप इस वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण पर विचार करें, तो ओडिशा में 22 प्रतिशत महिला कर्मचारियों की भागीदारी है।
उन्होंने कहा कि, 10 साल पहले यह 35 प्रतिशत था। यह पिछले दशक में नीचे चला गया है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मिश्रा ने कहा कि लगभग 30 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत महिलाओं को इंजीनियरिंग शिक्षा दी जा रही है। लिंग अंतर के बीच कौशल, भागीदारी और वेतन अंतर महत्वपूर्ण है। संवाद ग्रुप के चेयरमैन ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बीजद सरकार की पहल की सराहना की। पटनायक ने कहा कि लेनिन भी महिलाओं को सशक्त बनाने के पक्षधर थे।
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