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लोकपाल से मायावती बेखौफ, मुलायम को सता रहा है डर!

[अंकुर शर्मा] लोकपाल बिल को लेकर कवायद तेज हो गयी है। जहां समाजसेवी अन्ना हजारे लोकपाल के लिए अनशन पर बैठे हैं वहीं सदन के अंदर इस बिल को लेकर बहस जारी है। लेकिन बहस किसी नतीजे पर पहुंचे इससे पहले ही सपा की ओर से इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है। उसके सांसद संदन से वॉकआउट कर रहे हैं तो वहीं सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव से इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन हासिल करने की कोशिश के तहत मंगलवार को सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह से मुलाकात की।

एक बात गौर करने वाली है यहां कि जहां लोकपाल विधेयक पर पक्ष-विपक्ष पूरी तरह से एक-जुट दिखता है। विधेयक के बिंदुओं पर हर किसी की राय अलग-अलग हो सकती है लेकिन पार्टियां भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल विधेयक के मसले पर सजग हैं। लेकिन फिर क्यों सपा इस विधेयक के खिलाफ है और वह क्यों नहीं चाहती कि लोकपाल बिल पास हो।

सपा के इस रूख ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। टीवी पर चल रही बहस की मानें तो इसके पीछे मुलायम सिंह का एक डर है जिसकी वजह से वह इस बिल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और वह डर है सीबीआई का।

दरअसल मुलायम सिंह आय से अधिक संपत्ति के एक से ज्यादा मामलों में सीबीआई के घेरे में है और सीबीआई केंद्र सरकार के घेरे में जिसे वो समय-समय पर आदेश देती रहती है। अगर मुलायम जरा सा चूं-चां करते हैं तो सीबीआई का हथौड़ा उन पर पड़ जाता है और मामला कोर्ट में रफ्तार पकड़ लेता है लेकिन जब मुलायम ठंडे पड़ जाते हैं तो उनका मुकदमा तारीखों की भेंट चढ़ जाता है और केस की सुनवाई टाल दी जाती है।

जिसका डर मुलायम सिंह के फैसलों पर देखा जा सकता है। जब-जब विरोध दर्शाने की बात आती हैं तो संसद के बाहर तो मुलायम एंड पार्टी केन्द्र के खिलाफ बयानबाजी करने से नहीं चूकती है लेकिन संसद के अंदर आते ही वह या तो किसी बहस का हिस्सा नहीं बनते या फिर कांग्रेस के खिलाफ नहीं हो पाते हैं।

कहा जाता है कि जिस तरह एक जिन्न की जान तोते में होती है उसी तरह मुलायम की राजनीति के काले पन्नों की किताब सीबीआई के घेरे में है जिस पर केन्द्र यानी यूपीए का अंकुश है। और लोकपाल के अंदर सीबीआई आ जाती है तो वह दिन दूर नहीं जब मुलायम सिंह अपने केसों की वजह से जांच के घेरे में आ जायेंगे।

जैसा डर मुलायम को है वैसा शायद मायावती को नहीं है, हालांकि वह भी सीबीआई के तहत जांच के घेरे में हैं। संसद में मायावती की ओर से बसपा सांसद सतीश मिश्रा ने कहा कि बसपा इस बिल के समर्थन में है, जिससे कि अंदाजा लगाया जा सकता है कि मायावती बेखौफ हैं।

खैर राजनीति के इस मंच पर लोकपाल बिल बनता है कि नहीं क्योंकि लोकपाल बिल अब केवल प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बल्कि पार्टियों के चुनावी मुद्दे में शामिल हो गया है। ऐसे में सपा का अगला कदम इस विधेयक के सिलसिले में क्या होगा इसे देखना दिलचस्प होगा।

गौरतलब है कि पांच दिसंबर से शुरू हुआ संसद का सत्र 22 दिसंबर को समाप्त होने वाला है और सरकार पूरी तरह से लोकपाल विधेयक को पारित कराने के मूड में है क्योंकि लोकपाल के ही बल पर एक बार फिर से कांग्रेस जनता का भरोसा जीत सकती है।

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