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सबरीमाला मामला: केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फैसले पर पुनर्विचार की कोई जरूरत नहीं

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नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में हर आयुवर्ग की महिलाओं की एंट्री के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनपर सुनवाई के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान केरल सरकार की तरफ से फैसले पर पुनर्विचार किए जाने का विरोध किया गया। केरल सरकार की तरफ से वकील जयदीप गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश की और कहा कि फैसले को रिव्यू करने का कोई आधार नहीं है।

केरल सरकार ने याचिकाओं का विरोध किया

केरल सरकार ने याचिकाओं का विरोध किया

वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि आपके सामने ऐसे तथ्य नहीं रखे गए हैं जो रिव्यू को न्यायसंगत साबित करें। केरल सरकार ने अदालत में कहा कि इस फैसले पर पुनर्विचार की कोई आवश्यकता नहीं है। पिछले फैसले के कुछ बिंदुओं को उन्होंने कोर्ट के सामने दोहराते हुए कहा, 'तीन मुद्दों पर लॉर्ड्सशिप (बहुमत के फैसले में) की सहमति थी। सबसे पहले, अनुच्छेद 26 के तहत, यह एक संप्रदाय का मंदिर नहीं है। भगवान अयप्पा के भक्त एक संप्रदाय नहीं बल्कि हिंदुओं के एक सामान्य वर्ग के हैं। मंदिर में कोई भी जा सकता है।'

ये भी पढ़ें: सबरीमाला की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

केरल सरकार ने कहा- फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं

केरल सरकार ने कहा- फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं

50 साल की आयु तक किसी को बाहर करने का मतलब व्यक्ति के जीवन के एक प्रमुख हिस्से को बाहर निकाल देना है। जयदीप गुप्ता ने कहा कि मंदिरों से महिलाओं का दूर रखना हिंदू धर्म में आवश्यक नहीं है और कई अन्य अयप्पा मंदिरों में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति है। इस सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने अदालती कार्यवाही के लाइव टेलीकास्ट की अनुमति मांगी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं, वकील पराशरन ने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले को रद्द करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट ने हर आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने हर आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सालों पुराना प्रतिबंध हटाते हुए 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी थी। पाबंदी को लैंगिक भेदभाव बताते हुए कोर्ट ने सभी महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कई संगठन और लोग महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं।

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English summary
sabarimala review petitions in sc, Kerala Govt Says No Grounds For Review
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