युद्ध के बीच भी रूस दे रहा अपने दोस्त भारत का साथ, चीन-पाकिस्तान से निपटने के लिए भेजी ये चीजें
नई दिल्ली, 15 अप्रैल: भारत सरकार ने रूस के साथ S-400 मिसाइल सिस्टम का समझौता किया था। ये हाईटेक सिस्टम भारत आता, उससे पहले ही रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे जुड़े उपकरण भारत आने में देरी होगी, लेकिन रूस मुश्किल वक्त में भी हमारी पूरी मदद कर रहा है। जिसके तहत उसने S-400 सिस्टम को लेकर बड़ा कदम उठाया है।
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प्रशिक्षण के लिए भेजे सिमुलेटर
यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच रूस ने भारत के लिए S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के लिए मास्को से सिमुलेटर और अन्य उपकरण भेजे हैं। मिसाइल प्रणाली का दूसरा स्क्वाड्रन एक प्रशिक्षण स्क्वाड्रन है, इसमें सिमुलेटर और अन्य प्रशिक्षण से संबंधित उपकरण शामिल हैं। हालांकि अभी इसमें मिसाइल और लांचर शामिल नहीं है।

विमान का इंजन भी आया
रक्षा सूत्रों ने कहा कि मॉस्को से रक्षा आपूर्ति लगातार जारी है, क्योंकि भारतीय रक्षा बलों को ओवरहाल किए गए विमान के इंजन और पुर्जों की शिपमेंट प्राप्त हुई है। अभी इस बात की चिंता भारतीय अधिकारियों को सता रही कि क्या आने वाले दिनों में भी ये सप्लाई जारी रहेगी, क्योंकि रूस को भुगतान करने में आ रही समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

नए विकल्प तलाशे जा रहे
मामले में एक सरकारी सूत्र ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि रक्षा बलों को हाल ही में रूस से शिपमेंट प्राप्त हुई है और ये अभी भी जारी है। अभी तक आपूर्ति में कोई गड़बड़ी नजर नहीं आ रही। भारत सरकार सप्लाई कर रहे रूसी फर्मों को भुगतान नहीं कर पा रही, क्योंकि उन पर कई प्रतिबंध लगे हैं। ऐसे में भविष्य की सप्लाई को लेकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। भारतीय अधिकारी इस समस्या के समाधान के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं।

समुद्र के जरिए सप्लाई
अभी जो आपूर्ति हुई है, जिसमें लड़ाकू विमान के इंजन और एक विमान बेड़े के पुर्जे शामिल हैं। ये समुद्र के जरिए मास्को से भारत आए। मौजूदा वक्त में भारतीय वायुसेना का प्रमुख लड़ाकू विमान सुखोई 30 और Mi-17 हेलीकॉप्टर रूस निर्मित ही है। ऐसे में वक्त-वक्त पर इनके पुर्जों की जरूरत पड़ती रहती है।












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