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बुराड़ी के उस घर के पास जाने से रोकती है कोई 'अदृश्य शक्ति', लोगों के बीच फैला भ्रम

बुराड़ी के संत नंगर इलाके में इन दिनों चर्चा है कि कोई 'अदृश्य डर' स्थानीय लोगों को भाटिया परिवार के इस घर के पास जाने से रोकता है।

नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में हुई 11 लोगों की मौत के मामले में पिछले दिनों मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी से इस बात का खुलासा हो गया था कि परिवार के सभी लोगों की मौत एक दुर्घटनात्मक आत्महत्या थी। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर बताया गया था कि एक धार्मिक अनुष्ठान की प्रक्रिया में दुर्घटनावश परिवार के सभी 11 लोगों की जान गई थी। परिवार के कुछ लोग उस घर में रहने भी आए थे, जहां 11 लोगों की मौत हुई थी। अब इस मामले को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल बुराड़ी के संत नंगर इलाके में इन दिनों चर्चा है कि कोई 'अदृश्य डर' स्थानीय लोगों को भाटिया परिवार के इस घर के पास जाने से रोकता है।

घर के पास जाने से रोकता है एक 'अदृश्य डर'

घर के पास जाने से रोकता है एक 'अदृश्य डर'

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बुराड़ी की गलियों में इन दिनों एक भूतिया शक्ति की कहानी की चर्चा है। बुराड़ी के संत नगर इलाके में लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि जिस दो मंजिला घर के अंदर भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत हुई थी, रात में अंधेरा होने के बाद कोई 'अदृश्य डर' लोगों को उस मकान के करीब जाने से रोकता है। आमतौर पर शहर के लोगों में इस तरह के घरों के आसपास घूमने की सबसे ज्यादा जिज्ञासा होती है, शायद उन्हें लगता है कि इससे उन्हें किसी दूसरी दुनिया के बारे में कुछ रोमांचक कहानी पता चलेगी। लेकिन...बुराड़ी में ज्यादातर लोग दिन ढलते ही इस घर के आसपास जाने से बच रहे हैं। इलाके के बच्चे भी इस घर से दूर जाकर ही खेलते हैं।

'हम खुद उस तरफ खुलने वाले अपने कमरों में नहीं जाते'

'हम खुद उस तरफ खुलने वाले अपने कमरों में नहीं जाते'

इस घर के पड़ोस में रहने वाले कर्मपाल ने मामले में खुलासा करते हुए बताया, 'भाटिया परिवार के घर की बाहर जो दुकान है, शाम के वक्त अब वहां मोहल्ले का कोई भी व्यक्ति खड़ा नहीं होता। भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत से पहले इलाके के लड़के इस दुकान की सीढ़ीयों पर बैठ जाया करते थे, लेकिन अब नहीं बैठते। रात में अंधेरा होने के बाद हम खुद भी अपने घर के उन कमरों में नहीं जाते, जिनकी बालकनी भाटिया परिवार के घर की तरफ खुलती है। आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई के दिनों में, जब यह घटना घटी थी, उस वक्त भी चर्चा उठी थी कि घर की बाहरी दीवार से निकले 11 पाइपों का परिवार के 11 लोगों की मौत से कोई ना कोई कनेक्शन है।

'बेवजह फैलाई जा रही हैं डर की कहानियां'

'बेवजह फैलाई जा रही हैं डर की कहानियां'

वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा भी हो सकता है कि भाटिया परिवार के इस घर के बारे में बेवजह ही अफवाह भरी कहानियां गढ़ी जा रही हों। दरअसल, जुलाई में हुई 11 लोगों की मौत के एक महीने बाद ही परिवार के सदस्य और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रहने वाले दिनेश को इस घर की चाभी सौंप दी गई थी। इसके बाद दिनेश अपने परिवार के साथ एक महीने तक बिना किसी डर के इस घर में रहा था। घर में रहने के दौरान दिनेश ने बाहरी दीवार की तरफ लगे उन 11 पाइपों को भी हटा दिया था, जिनसे परिवार के लोगों की मौत को जोड़कर देखा जा रहा था। भाटिया परिवार के पड़ोसी अमरजीत सिंह ने बताया कि घटना से पहले दिनेश अक्सर अपने भाई ललित द्वारा घर में की कराए जा रहे मरम्मत के काम को देखने भी आता रहता था।

कहीं अफवाहों के पीछे भूमाफिया तो नहीं?

कहीं अफवाहों के पीछे भूमाफिया तो नहीं?

चाभी मिलने के बाद दिनेश ने हवन कराकर घर का ताला लगा दिया था। जबकि घर के बाहर मौजूद दोनों दुकानों को खाली करा दिया गया था। दुकान का सामान हटा रहे एक मजदूर ने बताया था कि हम सामान निकालने के लिए यहां दिन में केवल उजाला होने तक ही रुकते हैं, अंधेरा होते ही हम यहां से चले जाते हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इन अफवाहों के पीछे भूमाफिया भी हो सकते हैं, जो चाहते हों कि इस घर को कोई खरीद ना सके और आगे चलकर वो इसपर कब्जा कर लें। आपको बता दें कि भाटिया परिवार के 7 पुरुष और 4 महिलाओं की मौत के इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है।

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