प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागरिकता को लेकर दायर RTI

नई दिल्ली। देशभर में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर बहस छिड़ी हुई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। लेकिन इन सब के बीच एक आरटीआई दायर की गई है जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागरिकता के बारे में जानकारी मांगी गई है। यह आरटीआई केरल के सूचना विभाग में दायर करके मांगी गई है। जो आरटीआई दायर की गई है उसमे जानकारी मांगी गई है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के नागरिक हैं।

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    13 जनवरी को दायर आरटीआई

    13 जनवरी को दायर आरटीआई

    यह आरटीआई जोश कलुवेत्तिल ने दायर की है, जोकि चलक्कुणी के रहने वाले हैं, यह त्रिसूर शहर में स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागरिकता को लेकर यह आरटीआई 13 जनवरी को दायर की गई है। इस आरटीआई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की नागरिकता के दस्तावेज मांगे गए हैं। बता दें कि केरल में लेफ्ट की सरकार है। यहां की मौजूदा सरकार नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रही है। यही नहीं हाल ही में केरल विधान सभा में इस बाबत एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था।

    केरल सरकार सीएए के खिलाफ

    केरल सरकार सीएए के खिलाफ

    विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार से नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने का आग्रह किया गया। केरल विधानसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव का एकमात्र भाजपा विधायक ने विरोध किया था। यही नहीं केरल सरकार नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटा चुकी है। सरकार की ओर से सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अहम बात है कि इन तमाम विरोध के बीच केंद्र सरकार अपने रुख पर कायम है और उसका कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून से भारत के किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं जा रही है।

    लोग कर रहे विरोध

    लोग कर रहे विरोध

    बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। तमाम विपक्षी दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग में तकरीबन एक महीने से तमाम महिलाएं इस कानून के खिलाफ धरना दे रही हैं। गौरतलब है कि इस कानून के अनुसार उन तमाम लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई है जो भारत में 31 दिसंबर 2014 से रह रहे हैं और ये लोग अफगानिस्तान, पाकिस्तान या बांग्लादेश के हैं और उनके देश में धर्म के आधार पर उनके साथ शोषण किया गया है।

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