आरएसएस ने जनता से सरकारी नीतियों पर 'जागरूक जनमत' बनाने का आह्वान किया
आरएसएस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील अंबेकर ने सरकार की नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जनता को सूचित राय का आह्वान किया है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और रामभाऊ म्हालगी प्रबोधनी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम ने इन प्रयासों का नेतृत्व करने समाज के बुद्धिजीवियों की भूमिका के बारे में बात की।
अशोक गजानन मोदक की पुस्तक "अखंड मानवतावाद, विकास का एक विशिष्ट प्रतिमान" के प्रकाशन के कार्यक्रम में सुनील अंबेडकर ने ये बा कही।

अंबेकर ने दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र किया जिन्होंने अखंड मानवतावाद की अवधारणा को स्पष्ट किया, यह देखते हुए कि लोगों को राष्ट्र के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे सही और गलत की स्पष्ट समझ विकसित कर सकें।
उपाध्याय ने इस प्रक्रिया में बुद्धिजीवियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। अंबेकर ने कहा कि 'लोक जागरण' और 'लोकमत परीक्षण' जैसी पहल जागरूकता बढ़ाने और सूचित जनता की राय को सक्षम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने आगे जोर दिया कि सामाजिक ज्ञान का नेतृत्व करने वालों को निष्पक्ष रहना चाहिए और स्वार्थ से मुक्त रहना चाहिए। अंबेकर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीन-भाषा सूत्र को एक उदाहरण के रूप में उद्धृत किया, यह कहते हुए कि यह समझने की आवश्यकता है कि प्रगति सिर्फ अंग्रेजी नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं को सीखने के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
धमेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। अंबेकर ने ओटीटी सामग्री को विनियमित करने और चीन से जुड़े मोबाइल एप्लिकेशन, टिकटॉक से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए संभावित सरकारी कार्रवाई के बारे में बात की। इसके साथ ही धमेंद्र प्रधान ने पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जन समर्थन और सामाजिक जागरूकता के बिना, मुफ्त में वितरित करने जैसी राजनीतिक प्रथाएं बनी रहेंगी।












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