Rohith Vemula Case: 'न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई', पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर रोहित की मां ने उठाए सवाल
Rohith Vemula Case: रोहित वेमुला मामले पर तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर शनिवार यानी 4 मई को रोहित की मां और उनके भाई राजा वेमुला ने सवाल उठाया है। रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला ने कहा कि बेटे को न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।
आगे कहा कि पुलिस का यह दावा करना सही नहीं है कि रोहित ने ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाने के कारण आत्महत्या की। वह पढ़ाई में अच्छा था। उसने सभी राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर लीं। पुलिस कैसे साबित करेगी कि रोहित वेमुला एससी नहीं है?

राधिका वेमुला ने आगे यह भी कहा कि मैं सुबह रेवंत रेड्डी से मिली और उन्हें बताया कि मामला बंद हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हमें एक शब्द दिया। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला के शिक्षा प्रमाणपत्र नकली हैं, लेकिन वे नहीं हैं। वह 10वीं कक्षा में स्कूल में दूसरे स्थान पर था। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पुष्टि की कि मामले की जांच की जा रही है।
रोहित वेमुला मामले पर राजनीति विज्ञान में पीएचडी के छात्र गंगेश्वर ने कहा कि हमें जो क्लोजर रिपोर्ट मिली, वह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका थी। तत्कालीन कुलपति, तत्कालीन श्रम मंत्री, तत्कालीन एमएचआरडी मंत्री और तत्कालीन एबीवीपी अध्यक्ष की भूमिका की जांच के लिए परिसर के दलित विद्वानों द्वारा मामला दायर किया गया था। रोहित वेमुला की हत्या में उनकी संलिप्तता, रोहित वेमुला के प्रति उनका भेदभावपूर्ण व्यवहार, पुलिस ने इसकी कोई जांच नहीं की है। इसके बजाय, पुलिस रिपोर्ट रोहित वेमुला की जांच करती है और उसे अपराधी ठहराती है।
5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला?
- रोहित समेत 5 स्टूडेंट्स को हॉस्टल से निकाला गया था
- साल 2015 में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के 5 छात्रों पर ABVP के सदस्य पर हमले का आरोप लगा।
- यूनिवर्सिटी ने पांचों छात्रों को हॉस्टल से निकाल दिया। जिसमें रोहित भी शामिल था।
- हालांकि, यूनिवर्सिटी की प्रारंभिक जांच में पांचों छात्रों को क्लीनचिट दे दी थी। लेकिन, बाद में अपने फैसले को पलट दिया।
- 17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली थी।
- करीब 8 साल बाद तेलंगाना पुलिस ने रोहित की मौत को लेकर अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंपी।
क्या कहा क्लोजर रिपोर्ट में ?
पुलिस ने तेलंगाना हाईकोर्ट में दावा किया कि वो दलित नहीं था। रोहित इस बात को जानता था कि वह दलित नहीं था। जाति की पहचान उजागर होने के डर से उसने आत्महत्या कर ली थी। आगे यह भी कहा कि सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद यह स्थापित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिल सका कि आरोपी के कार्यों ने मृतक रोहित को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया।
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