आडवाणी को गिरफ्तार करने वाले अफसर को मोदी ने दी कैबिनेट में जगह!

पटना। मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनने जा रहे कड़क मिजाज व प्रभावशाली पूर्व नौकरशाह सांसद राजकुमार सिंह जब आईएएस थे तभी पूरे देश में वे चर्चित रहे थे। उस वक्त बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी के रथ रोकने का आदेश उनको दिया था। उस समय आरके सिंह समस्तीपुर के जिलाधिकारी थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के राम रथ को समस्तीपुर में रोकते हुए गिरफ्तार किया था।

रोक दी आडवाणी की रथ यात्रा

रोक दी आडवाणी की रथ यात्रा

यह घटना वर्ष 1990 की है। लालकृष्ण आडवाणी सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर रथ के साथ निकले थे जिसे बिहार के समस्तीपुर में 23 अक्तूबर 1990 को रोक दिया गया था। रथ रोकने तथा लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी में आरके सिंह ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी। तभी भाजपा ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और सरकार गिर गई थी।

सरकारी ऑफिसर से कैसे बने नेता?

सरकारी ऑफिसर से कैसे बने नेता?

आरके सिंह 1975 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी थे जिन्होंने बिहार के कई जिलों में बतौर जिला अधिकारी के तौर पर अपना योगदान दिया। फिर वर्ष 2011 में केंद्रीय गृह सचिव बनाए गए तथा वर्ष 2013 में रिटायर हो गए। उन्होंने ही समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव धमाके में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के लोगों के नाम सामने आने की बात कही थी।

सरकारी सर्विस में अपना योगदान देने के बाद आरके सिंह ने नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीतिक सफर का शुरूआत की और 64 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में शामिल हुऐ। भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिटायरमेंट के बाद आरके सिंह के मन में राजनीति करने की इच्छा जगी और बीजेपी के साथ हो गए। बीजेपी ने भी उन्हें सम्मान देते हुए पहली बार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की।

बिहार के सुपौल जिला के निवासी हैं आरके सिंह

बिहार के सुपौल जिला के निवासी हैं आरके सिंह

बिहार के सुपौल जिले के मूल निवासी राजकुमार सिंह का जन्म बसबिट्टी गांव में हुआ था। पढ़ाई लिखाई कर ग्रेजुएट होने के साथ साथ उन्होंने एलएलबी भी किया था। दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई करने के बाद कानून में बैचलर डिग्री हासिल की और आगे की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड की आरवीबी ड्वेल्फ यूनिवर्सिटी चले गये। फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में बिहार कैडर के 1975 बैच के आईएएस ऑफिसर बने। वह देश के महत्वपूर्ण पद पर अपना दायित्व निभा चुके हैं। देश के गृह सचिव पद से रिटायर होने वाले आरके सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो उन्होंने अपना लोकसभा क्षेत्र आरा को बनाया क्योंकि उनका ससुराल भोजपुर के बड़हरा ब्लॉक स्थित गजियापुर में पड़ता है जहां के लोग उनकी कार्यप्रणाली से काफी खुश है और लोगों ने उन्हें सराहा भी।

पुलिस विभाग में भी दिया अहम योगदान

पुलिस विभाग में भी दिया अहम योगदान

सांसद रहते हुए भी लोग उन्हें आज एक कुशल प्रशासक के रूप में याद करते हैं क्योंकि पुलिस नवीकरण में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। सांसद बनने के बाद उन्हे संसद के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पेंशन, जन शिकायत और कानून और न्याय संबंधी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य बनाया गया था। आपको बताते चलें की आर के सिंह आईएएस होने के बावजूद भी पुलिस विभाग के प्रति काफी सक्रिय थे। इस वजह से पुलिस, जेल के आधुनिकीकरण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के लिए ढांचा तैयार करने में अहम योगदान किया था। नौकरी करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभाग पर अपना योगदान दिया जिसमें रक्षा उत्पाद सचिव, गृह सचिव, इंडस्ट्रीज, जन कार्य और कृषि विभाग प्रमुख हैं।

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