Old Monk रम बनाने वाले कपिल मोहन का निधन, जानिए उनकी सफलता की कहानी
नई दिल्ली। रम का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में जिस ब्रांड का नाम सबसे पहले आता है वो है ओल्ड मोंक रम। इस ओल्ड मोंक रम की सफलता के पीछे जिस शख्स का सबसे ज्यादा हाथ वे थे ब्रिगेडियर कपिल मोहन। बीते 6 जनवरी को कपिल मोहन का 88 साल की उम्न में गाजियाबाद स्थित उनके आवास दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। आइए जानते है भारत के सबसे पहले शराब कारोबारी परिवार से आने वाले कपिल मोहन की सफलता की कहानी।

भारत के पहले शराब कारोबारी के बेटे थे कपिल मोहन
ओल्ड मंक रम बनने की कहानी की शुरूआत आजादी से पहले सन 1885 में होती है। जलियावाला बाग हत्याकांड वाले जनरल डायर के पिता एडवर्ड डायर ने साल 1885 में हिमाचल के कसौली में एक शराब कंपनी खोली थी जिसका नाम था डायर ब्रियुरी। आजादी के बाद इस कंपनी को एएन मोहन ने खरीद लिया और इस कंपनी का नाम बदलकर मोहन मैनिक लिमिटेड कर दिया। कपिल मोहन इन्हीं एएन मोहन के बेटे थे।

सेना में ब्रिगेडियर थे कपिल मोहन
कपिल मोहन भारतीय सेना में थे। वे सेना में ब्रिगेडियर के पद से रिटायर्ड हुए थे। भारतीय सेना में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल के अवार्ड से नवाजा गया था। सेना से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने 1973 में मोहन मैनिक लिमिटेड कंपनी की संभाली। कपिल मोहन ने चेयरमैन बनने के बाद कंपनी में कई सारे बदलाव किए जिससे न सिर्फ कंपनी बल्कि ओल्ड मंक रम भारत का ससे मशहूर ब्रांड बन गया।

2010 में मिला था पद्म श्री
आज ओल्ड मोंक रम की मांग भारत में नहीं बल्कि विदेशों में भी है। ओल्ड मोंक रम इस समय दुनिया के 50 से भी ज्यादा देशों में बिकती है। 2010 में कपिल मोहन को भारत सरकार ने पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया था। बीते एक साल से कपिल मोहन की तबीयत खराब चल रही थी। 6 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अब उनके भतीजे हेमंत मोहन को कंपनी का चैयरमैन बनाया गया है।












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