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Justice to Nirbhaya: क्या इसलिए निर्भया मामले में इंसाफ मिलने में हो रही है देरी?

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बेंगलुरू। गत 22 जनवरी को जारी डेथ वारेंट पर अमल नहीं होने की सूरत में दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट ने अब 1 फरवरी, सुबह 6 बजे निर्भया गैंगरेप और मर्डर के दोषी चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने का आदेश जारी किया है, लेकिन अब 1 फरवरी को भी दोषियों की फांसी पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं। आरोप है कि दिल्ली सरकार के अधीन जेल विभाग में वर्ष 2018 में किए गए बदलावों के चलते निर्भया के दोषियों को फांसी के टलने की मुख्य वजह है, जिसकी मदद से बार-बार फांसी की तारीख को टालने में सफल हो रहे हैं।

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केजरीवाल सरकार की मंशा पर सवाल तभी उठने शुरू हो गए थे जब वर्ष 2017 में दोषियों की सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बावजूद दोषियों की फांसी पर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने के बजाय केजरीवाल सरकार सोती रही थी। निर्भया के दोषियों की फांसी में देरी को जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के आरोपी कन्हैया कुमार समेत 7 लोगों की चार्जशीट को मंजूरी देने में टाल मटोल से भी देखा जा रहा है, जिसे दिल्ली पुलिस ने सितंबर, 2019 में दिल्ली सरकार को अनुमित के लिए भेजा था। दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय अभी वह फाइल पड़े-पड़े धूल खा रही है।

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गौरतलब है केंद्रीय मंत्री स्मृति ईऱानी ने भी निर्भया के दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए दिल्ली के सीएम पर निशाना साधा है। उन्होंने केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई, उसके बाद भी केजरीवाल सरकार और उनके अधीन जेल प्रशानन द्वारा फांसी की प्रक्रिया शुरू करने में ढिलाई बरती गई।

ईरानी ने केजरीवाल यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल को निर्भया के आरोपियों से सहानुभूति है। शायद इसीलिए निर्भया के साथ सबसे अधिक बर्बरता से पेश आए छठे नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह से तीन वर्ष बाद निकलने के बाद 10 हजार रुपए नकद और सिलाई मशीन मुहैया करवाए।

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दरअसल, निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख में बार-बार बदलाव किए जाने से पूरा देश आशंकित है और यह जानना चाहता है कि आखिर ऐसा क्या है, जिसके चलते निर्भया के दोषियों को फांसी पर नहीं चढ़ाया जाया पा रहा है।

पता चला कि दिल्ली सरकार द्वारा वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में किए गए बदलाव चलते ही निर्भया के चारों दोषियों को फांसी को चढ़ाने में देरी हो रही है। वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में किए गए संशोधन का फायदा उठाकर ही चारों दोषी लगातार अपनी फांसी को टालने में सफल हो रहे हैं और अब डेथ वारेंट की नई तारीख 1 फरवरी पर भी आशंका के बादल मंडरा रहे हैं।

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चूंकि अभी भी 2 अन्य दोषी क्रमशः अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा के पास फांसी की तिथि आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का अंतिम कानूनी विकल्प बचा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटियाला हाउस कोर्ट से जारी 1 फरवरी को भी दोषियों को फांसी पर लटकाना भी जेल प्रशासन के लिए संभव नहीं हो जाएगा।

फिर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट को एक बार फिर एक नई तारीख और एक नया डेथ वारेंट जारी करना पड़ सकता है। हालांकि फांसी में देरी के लिए केजरीवाल सरकार पर विपक्ष के लगाए आरोपों के बाद सामने आए सीएम केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार भी चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी हो।

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माना जा रहा है कि निर्भया के चारों दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए जेल का नया मैन्युअल है, जिसे केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2018 में संशोधित किया है। संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 के मुचाहित एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है, जिसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

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पूरी आशंका है कि दिल्ली पटियाला हाऊस द्वारा दी गई फांसी की नई तारीख 1 फरवरी को चारों दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा, क्योंकि भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिकॉर्ड 4 दिन में दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है, लेकिन बाकी 3 दोषियों के पास अभी दया याचिका के जरिए फांसी की तारीख को टालने का विकल्प बचा हुआ है।

अमूमन दया याचिका को खारिज होने में कम से कम 7 दिन का वक्त लगता है और तो पूरी आशंका है कि शेष बच्चे आरोपी 1 फरवरी और उससे आगे की मुकर्रर फांसी को टालने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा संशोधित किए गए नए जेल मैनुअल को फांसी की तारीख को टालने के लिए एक टूल का तरह इस्तेमाल करेंगे।

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शायद यही कारण है कि दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नए जेल मैनुअल से खीझकर दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने दिल्ली सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता धींगड़ा सहगल की पीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को खरी-खोटी सुनाई थी।

कोर्ट ने कहा, 'आप तब तक एक्शन नहीं ले सकते जब तक कि सभी दोषियों ने दया याचिका दायर नहीं कर दी हो, तो आपका कानून खराब है। ऐसा लगता है कि (नियम बनाते वक्त) दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया। हर दया याचिका अलग-अलग आधार पर दायर की जाती है। आप आखिरी न्यायिक फैसले का इस तरह मजाक नहीं बना सकते।'

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्ट ने दिल्ली सरकार के साथ-साथ जेल अथॉरिटीज को भी फटकार लगाई थी। जजों ने इस बात पर दुख जताया कि ऐसा सिस्टम बनाया गया जो 'कैंसर से जूझ रहा है' और जो 'रणनीति के तहत' फांसी टालने के लिए दोषियों को 'कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है।

दरअसल, संशोधित जेल मैनुअल के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है जब तक प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

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दिल्ली सरकार के अधीन जेल विभाग का नया जेल मैनुअल केजरीवाल के इरादों पर संदेह करने के पूरे मौके देते है, इसकी पुष्टि दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुकी है। इसलिए कहा जा सकता है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार देशद्रोह के आरोपों से पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार और निर्भया दोषियों को फांसी से बचाने के लिए कर रही है।

यह मामला तब और संगीन हो गया था जब दिल्ली सरकार की वकील रही इंदिरा जयसिंह ने निर्भया को मां को चारों दोषियों को माफ करने की सलाह दे दी थी। वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां आशा देवी को सलाह देते हुए कहा था कि जिस तरह से कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की हत्या की आरोपियों को माफ कर दिया उसी तरह से निर्भया की मां को भी चारों दोषियों को माफकर देना चाहिए

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हालांकि इंदिरा जयसिंह की सलाह सुनकर गैंगरेप की शिकार हुई निर्भया की आशा देवी बेहद नाराज हो गईं और इंदिरा जयसिंह को उनकी सलाह के लिए खूब भला बुरा कहा। आशा देवी ने कहा कि अगर भगवान भी उनके सामने आ जाएं तो वो चारों दोषियों को माफ नहीं करेंगी। आशा देवी ने कहा कि चारों दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने के बाद ही निर्भया को इंसाफ मिलेगा।

चूंकि दिल्ली का विधानसभा चुनाव नजदीक है और दिल्ली की जनता को तय करना है कि उसे कैसी सरकार चाहिए। मालूम हो, दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने हैं और मतगणना 11 फरवरी को होनी है। केजरीवाल सरकार अपने फ्री के वादों के साथ फिर मैदान में है और अबकी बार 67 पार के नारे के साथ ताल ठोक रही है।

कन्हैया कुमार की चार्जशीट में देरी, अब निर्भया दोषियों की फांसी में देरी, उठे केजरीवाल की मंशा पर सवाल?

नए जेल मैनुअल का इस्तेमाल फांसी टालने के लिए कर रहे हैं चारो दोषी

नए जेल मैनुअल का इस्तेमाल फांसी टालने के लिए कर रहे हैं चारो दोषी

पूरी आशंका है कि दिल्ली पटियाला हाऊस द्वारा दी गई फांसी की नई तारीख 1 फरवरी को चारों दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा, क्योंकि भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिकॉर्ड 4 दिन में दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है, लेकिन बाकी 3 दोषियों के पास अभी दया याचिका के जरिए फांसी की तारीख को टालने का विकल्प बचा हुआ है। अमूमन दया याचिका को खारिज होने में कम से कम 7 दिन का वक्त लगता है और तो पूरी आशंका है कि शेष बच्चे आरोपी 1 फरवरी और उससे आगे की मुकर्रर फांसी को टालने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा संशोधित किए गए नए जेल मैनुअल को फांसी की तारीख को टालने के लिए एक टूल का तरह इस्तेमाल करेंगे।

संशोधित जेल मैनुअल पर दिल्ली सरकार को फटकार चुकी है हाईकोर्ट

संशोधित जेल मैनुअल पर दिल्ली सरकार को फटकार चुकी है हाईकोर्ट

शायद यही कारण है कि दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नए जेल मैनुअल से खीझकर दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने दिल्ली सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता धींगड़ा सहगल की पीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा, 'आप तब तक एक्शन नहीं ले सकते जब तक कि सभी दोषियों ने दया याचिका दायर नहीं कर दी हो, तो आपका कानून खराब है। ऐसा लगता है कि (नियम बनाते वक्त) दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया। हर दया याचिका अलग-अलग आधार पर दायर की जाती है। आप आखिरी न्यायिक फैसले का इस तरह मजाक नहीं बना सकते।'

फांसी टालने के लिए कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है नया जेल मैनुअल

फांसी टालने के लिए कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है नया जेल मैनुअल

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्ट ने दिल्ली सरकार के साथ-साथ जेल अथॉरिटीज को भी फटकार लगाई थी। जजों ने इस बात पर दुख जताया कि ऐसा सिस्टम बनाया गया जो 'कैंसर से जूझ रहा है' और जो 'रणनीति के तहत' फांसी टालने के लिए दोषियों को 'कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है। दरअसल, संशोधित जेल मैनुअल के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है जब तक प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

दिल्ली सरकार के अधीन है जेल, 2018 में जेल मैनुअल में किया गया संशोधन

दिल्ली सरकार के अधीन है जेल, 2018 में जेल मैनुअल में किया गया संशोधन

दिल्ली सरकार के अधीन जेल विभाग का नया जेल मैनुअल केजरीवाल के इरादों पर संदेह करने के पूरे मौके देते है, इसकी पुष्टि दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुकी है। इसलिए कहा जा सकता है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार एंटी नेशनल और प्रो रेपिस्ट जैसा व्यवहार कर रही है।

दिल्ली सरकार ने कन्हैया कुमार के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी

दिल्ली सरकार ने कन्हैया कुमार के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी

दिल्ली पुलिस अभियोग की मंजूरी के लिए तब से केजरीवाल सरकार के चक्कर काट रही थी और अचानक सितंबर 2019 को ऐन जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के वक्त केजरीवाल सरकार ने कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ अभियोजन के लिए मंजूरी नहीं देने का फैसला कर लिया। मामले पर दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने कहना था कि मामले में दिल्ली पुलिस ने जो सबूत पेश किए हैं उनके आधार पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता है। कारण स्पष्ट था कि केजरीवाल सरकार कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के अभियोजन के लिए मंजूरी के पक्ष में नहीं है।

1 फरवरी को भी चारों दोषियों की फांसी पर चढ़ाना हुआ मुश्किल

1 फरवरी को भी चारों दोषियों की फांसी पर चढ़ाना हुआ मुश्किल

निर्भया के चारों दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए जेल का नया मैन्युअल है, जिसे केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2018 में संशोधित किया है। संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए। यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है, जिसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

दोषी अक्षय ठाकुर व विनय शर्मा के पास अभी भी बचा है अंतिम विकल्प

दोषी अक्षय ठाकुर व विनय शर्मा के पास अभी भी बचा है अंतिम विकल्प

चूंकि अभी भी 2 अन्य दोषी क्रमशः अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा के पास फांसी की तिथि आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का अंतिम कानूनी विकल्प बचा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटियाला हाउस कोर्ट से जारी 1 फरवरी को भी दोषियों को फांसी पर लटकाना भी जेल प्रशासन के लिए संभव नहीं हो जाएगा और फिर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट को एक बार फिर एक नई तारीख और एक नया डेथ वारेंट जारी करना पड़ सकता है। हालांकि फांसी में देरी के लिए केजरीवाल सरकार पर विपक्ष के लगाए आरोपों के बाद सामने आए सीएम केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार भी चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी हो।

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English summary
The whole country is apprehensive due to repeated changes in the date of execution of Nirbhaya convicts and wants to know what is the reason behind which Nirbhaya convicts are not able to be hanged. It is learned that due to the changes made in the jail manual by the Delhi government in the year 2018, there is a delay in hanging the four convicts of Nirbhaya. By taking advantage of the amendments made in the jail manual in the year 2018, the four convicts are continuously able to postpone their execution and now the new date of the death warrant is on 1 February.
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