आज़म खां के 13 दिन के स्टडी टूर का रिजल्ट 4 महीने में!

Azam Khan
उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री आजम खां के नेतृत्व में 17 लोगों का दल तुर्की, नीदरलैंड, ब्रिटेन, ग्रीस और यूएई का स्टूडी टूर कर वापस आ गया है। मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़‍ितों के दर्द की दुहाई देते हुए मीडिया ने इस स्टडी टूर को पैसे की बर्बादी करार दिया और कहा कि अख‍िलेश सरकार के नेता अय्याशी करने गये हैं। लेकिन हम कहते हैं कि इस स्टडी टूर का रिजल्ट 3 महीने के अंदर आ जायेगा। लेकिन रिजल्ट घोषित करने वाले अखिलेश या मुलायम नहीं होंगे, यूपी की जनता होगी।

जी हां टूर पर जो खर्च हुआ सो हुआ, लेकिन अब बात समय आ गया है जवाबदेही का। यूपी की जनता को अब अख‍िलेश सरकार को अल्टीमेटम देना चाहिये कि इस स्टडी टूर से जो फाइंडिंग्स निकली हैं, उन्हें लागू करने की शुरुआत अगर तीन महीने के अंदर नहीं कर सकते हैं, तो लोकसभा में यूपी से सीटें जीतने का सपना देखना अभी से बंद कर दें।

आजम खां ने कहा कि मंत्रियों व विधायकों के दल ने विदेश दौरे के दौरान कूड़े से बिजली बनाने की प्रक्रिया पर विशेष अध्ययन किया। उत्तर प्रदेश में भी कूड़े से बिजली बनाने के लिए एक इकाई को अनुमति दे दी गई है। अभी चार और इकाइयों को अनुमति दिया जाना है।

आजम खां की यह बात उन लोगों के लिये सपने जैसी है, जिनके घरों में एक-एक सप्ताह तक बिजली नहीं आती। उन लोगों के लिये सपने जैसी है, जो लोग स्थानीय जैनरेटरों से बिजली खरीदते हैं और उसके बदले में भारी भरकम कीमतें चुकाते हैं। यही वो लोग हैं, जो 2014 के लोकसभा चुनाव में वोट डालने जा रहे हैं। लिहाजा अब स्टडी टूर पर पैसे की बर्बादी को कोसने से अच्छा है, जनता सरकार पर दबाव बनाये कि कूड़े से बिजली बनने के प्लांट बनना कब शुरू होंगे। हमें मालूम है कि यह काम एक दो महीने का नहीं, एक प्लांट की स्थापना में साल से ऊपर लग सकता है, लेकिन हां एक सकारात्मक दिशा में काम तो शुरू किया ही जा सकता है।

क्यों न यूपी के विश्वविद्यालयों में इन मंत्रियों का स्पेशल लेक्चर हो जाये?

इस स्टडी टूर से जुड़ा एक बड़ा सवाल यह भी है कि कूड़े से बिजली बनाने की प्रक्रिया को सीखने के लिये मंत्रियों को भेजने की क्या आवश्यकता पड़ गई, इसके लिये तो उन इंजीनियरों को भेजना चाहिये था, जो जमीनी स्तर पर इस परियोजना को साकार रूप देंगे। उन अध‍िकारियों को भेजना चाहिये था, जो इस परियोजना की प्लानिंग करेंगे। खैर अब इस पर लीख पीटने का भी कोई फायदा नहीं, क्योंकि उन होटलों का पेमेंट हो चुका है, जहां हमारे माननीय मंत्री रुके थे। लेकिन हां एक अगर वाकई में यह स्टडी टूर था, तो अख‍िलेश यादव टूर पर गये मंत्री-विधायकों का एक टेस्ट तो कंडक्ट करवा ही सकते हैं, कि आख‍िर उन्होंने क्या सीखा, चलिये टेस्ट न सही उत्तर प्रदेश में 53 विश्वविद्यालय हैं, उनमें से 17 विश्वविद्यालयों में तो इन 17 लोगों का व्याख्यान या स्पेशल लेक्चर आयोजित करवाया ही जा सकता है। अगर ऐसा हो जाये, तो करोड़ों के खर्च पर जो ज्ञान हमारे माननीय मंत्री यूपी लेकर आये हैं, वो हमारे छात्रों तक भी पहुंच सके।

खैर हमें मालूम है कि यूपी सरकार ऐसा कुछ नहीं करने वाली, और न ही यूपी की जनता इतनी ताकतवर हुई है, कि सरकार से ये सवाल कर सके। लिहाजा यहां पर विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी चाहें तो इस मामले को लोकसभा चुनाव तक खींच सकती है और खींचना भी चाहिये, क्योंकि जिस पैसे पर यह टूर हुआ है, वो जनता की गाढ़ी कमाई है। यह कमाई वेस्ट हुई या प्रदेश के विकास में लगी, यह फैसला जनता को तीन महीने बाद ईवीएम का बटन दबाते वक्त करना होगा।

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