हनीमून पीरियड खत्म होते ही अनशन पर बैठे दिग्विजय सिंह

इसको देखते हुए दिग्विजय सिंह की ओऱ से मध्य प्रदेश में किए जा रहे अनशन पर और भी सवाल उठ रहे हैं, सवाल है कि क्या केंद्र में रहते हुए उन्होंने कभी किसानों के लिए आवाज उठाई? आखिर एकदम से क्या हुआ कि पूरे देश के मुद्दे को मध्य प्रदेश में जाकर भुनाया जा रहा है जबकि किसानों की दरिद्रता की समस्या अब से नहीं पहली पंचवर्षीय योजना यानी 1951 से लेकर अब तक बरकरार है।
क्या पूरा हुआ हनीमून पीरियड
1993- 2003 के दौरान मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद दिग्विजय सिंह को संगठन के अलावा केंद्र की सत्ता में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। जिसकी खिस्सियाहट दिग्विजय सिंह के बयानों में अकसर दिखाई दी। पार्टी लाइन से हटकर बयान देकर बवाल खड़ा करने वाले दिग्विजय सिंह को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हमेशा कई बार किनारे भी कर दिया। बटला हाउस एनकाउंटर पर जांच कराने के उनके बयान ने तो पार्टी लाइन से हटकर ही एक बखेड़ा खड़ा कर दिया था।
दिग्विजय ने कह दिया था कि बटला हाउस एनकाउंटर झूठा एनकाउंटर था। जिसके बाद केंद्र में कांग्रेस सरकार पर उंगलियां उठने लगीं। उनकी बेलगाम जुबान का उदाहरण अभी हाल ही में तब देखने को मिला जब एक टीवी केबल के कैमरे के सामने दिग्गी ने कहा कि राहुल गांधी में शासक के गुण नहीं हैं। इस तरह के ही बयानों और बेलगाम जुबान की वजह से कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को हमेशा निकम्मा समझते हुए बड़ी जि्म्मेदारी नहीं सौंपी। और तो और उनसे प्रवक्ता के अधिकार भी छीन लिए थे।
महाराष्ट्र क्यों नहीं जाते दिग्गी राजा
दूसरा सवाल दिग्विजय सिंह से यह है कि यदि वह किसानों के लिए वाकई लड़ना चाहते हैं तो महाराष्ट्र में जाकर अनशन पर क्यों नहीं बैठते। आपको बता दें कि महाराष्ट्र एक ऐसे राज्य में शुमार है जहां किसानों ने सबसे ज्यादा आत्महत्या की है। गत वर्ष तीन हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसके अलावा महाराष्ट्र में ही वर्ष 1995 से लेकर अब तक करीब 70 हजार किसानों ने आत्महत्या की है।
अगर पूरे देश की बात करें तो पिछले दस वर्ष में दो लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। दरअसल बात यह है कि दिग्विजय सिंह यदि महाराष्ट्र गए तो उनके लिए भारी पड़ जाएगा। क्योंकि महाराष्ट्र में उनकी ही पार्टी कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ मिलकर शासन कर रही है। इनके शासन काल में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा वह नहीं उठाना चाहते।
केंद्र में रहते क्यों कुछ नहीं किया?
दिग्विजय सिंह से यह भी सवाल है कि दिग्विजय सिंह एक ऐसी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं जो देश पर सबसे ज्यादा बार राज कर चुकी है। केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने किसानों के लिए क्यों कुछ नहीं किया।
इसके पीछे डर है ?
मध्य प्रदेश में जाकर अपने सीमाओं को बांधने के पीछे दिग्विजय सिंह को अपने राजनीतिक करियर को लेकर डर तो नहीं छिपा है। दरअसल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ऐतिहासिक हार के बाद दिग्वजिय सिंह को लगने लगा है कि अब उन्हें वापस मध्य प्रदेश में चले जाना चाहिए।
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