मांझी का इस्तीफा: अभिमन्यु की हत्या या फिर भाजपा के बेनकाब
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के इस्तीफे के बाद आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। मांझी के इस्तीफे को जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 'अभिमन्यु की हत्या' बता रही है, वहीं जनता दल दल (युनाइटेड) इस इस्तीफे से भाजपा के बेनकाब हो जाने की बात कह रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव ने मांझी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "कौरवों ने अभिमन्यु की हत्या कर दी।
कांग्रेस, जद (यू), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मिलकर मांझी को इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। इससे इन सभी दलों का महादलित और दलित विरोधी चेहरा उजागर हो गया है।" उन्होंने कहा कि भाजपा महादलित मुख्यमंत्री के साथ थी। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के कारणों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह तो मुख्यमंत्री मांझी से पूछा जाना चाहिए।
जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, "राज्य में भाजपा की घिनौनी और खरीद-फरोख्त की राजनीति का पदार्फाश हो गया है।" उन्होंने कहा कि मांझी सरकार को सात से 20 फरवरी तक का जो समय दिया गया था, उससे यह प्रमाणित हो गया कि भाजपा के इशारे पर ही सरकार को जीवनदान मिला था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि मांझी के इस्तीफे से साबित हो गया कि उनके पास बहुमत नहीं था। उनके इस्तीफे से भाजपा का चेहरा सबके सामने आ गया है।
राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा, "लोकतंत्र संख्याबल से चलता है, और नीतीश कुमार के साथ संख्याबल है। ऐसे में मांझी को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।" मांझी ने शुक्रवार को राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मिलकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंप दिया।













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