स्पूतनिक-वी का भारत में उत्पादन शुरू, मोरपेन लेबोरेटरीज ने तैयार किया पहला टेस्ट बैच
नई दिल्ली, जुलाई 06: भारत में कोरोना के खिलाफ लोगों को तीन टीके लगाए जा रहे हैं। कोविशील्ड और कोवैक्सीन की उत्पादन जहां भारत में किया जा रहा है तो वहीं तीसरा कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी रूस से आयात की जा रही है। लेकिन अब जल्द ही स्पूतनिक वी का उत्पादन भारत में में शुरू हो जाएगा। रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) और मोरपेन लेबोरेटरीज ने हिमाचल प्रदेश में एक विशेष सुविधा में स्पुतनिक वी के परीक्षण बैच के उत्पादन की घोषणा की है।
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इससे पहले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई (डीजीसीआई) ने रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी बनाने के लिए पैनेशिया बायोटेक को मंजूरी दे दी है। स्पूतनिक-वी बनाने के लिए कुल 6 कंपनियों ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के साथ एग्रीमेंट किया है, जिनमें से एक है पैनेशिया बायोटेक। पैनेशिया बायोटेक हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित फैक्ट्री में कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी बनाएगी।
एग्रीमेंट के तहत पैनेशिया बायोटेक ने पहली खेप को वहां बनाकर इसे रूस के गामालेया केंद्र भेजा गया था, जहां से वैक्सीन के गुणवत्ता पर खरे उतरने को रूस की हरी झंडी मिल गई है। अब भारत में बड़े स्तर पर इसका निर्माण होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पैनेशिया बायोटेक पहली कंपनी है, जो स्पूतनिक-वी का निर्माण भारत में करेगी। कोरोना महामारी के खिलाफ दो डोज वाली स्पूतनिक-वी वैक्सीन 91.6 फीसदी कारगर है।
स्पुतनिक वी को भारत में 12 अप्रैल 2021 को आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति के साथ पंजीकृत किया गया। इसके साथ ही कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये 14 मई से टीकाकरण अभियान में इसका इस्तेमाल भी शुरू कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरडीआईएफ के साथ अपनी शर्तों के तहत पैनशिया हर साल 100 मिलियन खुराक का उत्पादन करने की संभावना है।












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