RBI Report : बैंकों को ग्रास NPA पर मिली बड़ी राहत, 8.2% से घटकर 6.9% रह गया
नई दिल्ली, 28 दिसंबर: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2020-21 की रिपोर्ट जारी की है। अपनी रिपोर्ट में आरबीआई बताया कि प्रतिबंधों में ढील से वैश्विक आर्थिक गतिविधि और व्यापार में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। वैश्विक स्तर पर बैंकिंग क्षेत्र पर कोरोना वायरस महामारी का प्रभाव संपत्ति की गुणवत्ता में ठहराव के साथ-साथ मजबूत नीति समर्थन जारी रहने के कारण शांत रहा है। रिपोर्ट में आरबीआई ने अब तक 2020-21 और 2021-22 के दौरान को-ऑपरेटिव बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस सहित बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन को पेश किया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2020-21 की रिपोर्ट मंगलवार को जारी की। अपनी रिपोर्ट में आरबीआई बताया कि शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंकें (एससीबी) का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) मार्च 2020 के अंत में 8.2 प्रतिशत से घटकर मार्च 2021 के अंत में 7.3 प्रतिशत रह गया, जो सितंबर 2021 के अंत में 6.9 प्रतिशत रह गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एससीबी का रिटर्न ऑन एसेट्स (आरओए) मार्च 2020 के अंत में 0.2 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2021 के अंत में 0.7 प्रतिशत हो गया। जिसे स्टेबल इनकम और खर्च में कमी से खासा सपोर्ट मिला।
आरबीआई ने बताया कि 2020-21 के दौरान महामारी और आर्थिक गतिविधियों में परिणामी दबाव के बावजूद, एससीबी की समेकित बैलेंस शीट के आकार में विस्तार हुआ। 2021-22 में अब तक क्रेडिट ग्रोथ में रिकवरी के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। आरबीआई ने कहा कि सितंबर 2021 के अंत में जमा में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले यह 11 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2020-21 में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) की बैलेंस शीट की वृद्धि जमाओं से प्रेरित थी, जबकि ऋण वृद्धि में कमी के कारण निवेश में तेजी आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजी की स्थिति और लाभप्रदता सहित उनके वित्तीय संकेतकों में सुधार हुआ है।












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