500 रुपए के नोट बंद नहीं होंगे, 1,000 रुपए के नोट के बारे में क्या बोले RBI गवर्नर? जानिए
रिजर्व बैंक ने आज मौद्रिक नीति के ऐलान के साथ 500 रुपए के नोट के बंद होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने 1000 रुपए के नोट के फिर से प्रचलन से भी इनकार किया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि 500 रुपए के नोट वापस लिए जाने पर कोई विचार नहीं चल रहा है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि आरबीआई 1000 रुपए वाले करेंसी नोट फिर से जारी करने के बारे में भी नहीं सोच रहा है।
500 रुपए के नोट बंद नहीं होंगे-आरबीआई गवर्नर
मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद प्रेस से बात करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई का 500 रुपए के नोट को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 1000 रुपए वाले करेंसी नोट को भी फिर से लाने की कोई बात नहीं है और ऐसी चर्चाओं को उन्होंने सिर्फ अटकलबाजी करार दिया है।
जनता से अनुरोध है कि अनुमान न लगाएं- आरबीआई गवर्नर
दरअसल, आरबीआई गवर्नर को यह बातें इसलिए कहनी पड़ी हैं क्योंकि देश का केंद्रीय बैंक 2000 रुपए वाले करेंसी नोट प्रचलन से वापस ले रहा है, हालांकि यह लीगल टेंडर बना हुआ है। शक्तिकांत दास ने कहा, 'आरबीआई 500 रुपए के नोट वापस लेने की नहीं सोच रहा है या 1000 रुपए मूल्यवर्ग के नोट को फिर से नहीं ला रहा है; जनता से अनुरोध है कि अनुमान न लगाएं।'
2000 रुपए के नोट पर क्या बोले आरबीआई गवर्नर
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बताया है कि 2000 रुपए वाले 1.80 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट वापस हो चुके हैं, जो कि 2000 रुपए के प्रचलन में मौजूद कुल नोट के मूल्य के करीब आधे हैं। उन्होंने बताया कि अब 2000 रुपए के करीब 85% नोट बैंकों के पास हैं, जो कि उम्मीदों के मुताबिक ही है।
'अपनी सुविधा के हिसाब से 2000 रुपए के नोट जमा करें'
इसके साथ ही रिजर्व बैंक के गवर्नर ने लोगों से अपील की है कि 2000 रुपए वाले नोट जमा करने के लिए अंतिम समय में जल्दबाजी से बचें। उन्होंने कहा, 'मैं जनता से अपील करना चाहूंगा कि अपनी सुविधा से 2000 रुपए के मूल्य वाले नोट जमा करने के लिए बैंकों के ब्रांच में जाएं। जल्दबाजी की कोई वजह नहीं है। सितंबर के आखिर 10-15 दिनों में कृप्या जल्दबाजी न करें।'
रेपो रेट में बदलाव नहीं
इस बीच अपनी ताजा मौद्रिक नीति समिति की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 6.5% पर कायम रखा है। उधर खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमानों के पहले के 5.2% से घटाकर 5.1% कर दिया गया है।












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