राम विलास पासवान के बदले तेवर, बोले-'दलितों और मुस्लिमों को लेकर सोच बदले BJP'

पटना। बीजेपी के सहयोगी रामविलास पासवान को यूपी-बिहार के उपचुनाव में मिली हार के बाद डर सताने लगा है। एलजेपी अध्यक्ष ने बीजेपी को सलाह दी है कि उसके नेताओं को दलितों और अल्पसंख्यकों के बारे में धारण बदलने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने एनडीए नेताओं से बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने से बचने की भी सलाह दी है। साथ ही पासवान ने आरोप लगाया कि बीजेपी में कुछ खास लोगों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। वहीं एनडीए छोड़ महागठबंधन में जाने वाले दलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जाने वाले को कोई नहीं रोक सकता लेकिन उनको पछताना पड़ेगा। केंद्र में नरेंद्र मोदी व बिहार में नीतीश कुमार हमारे नेता हैं।

बीजेपी को अपने बारे में जनधारणा में बदलाव की जरूरत है

बीजेपी को अपने बारे में जनधारणा में बदलाव की जरूरत है

पासवान ने कहा, 'बीजेपी को अपने बारे में जनधारणा में बदलाव की जरूरत है, खासकर अल्पसंख्यक और दलितों के मामले में। पार्टी में सुशील मोदी, राम कृपाल यादव जैसे वरिष्ठ नेता हैं लेकिन उनकी बातों को लगातार दबाया जाता है। वहीं कुछ लोग हैं जिनकी बातों को ज्यादा तवज्जो मिलती है।' केंद्रीय मंत्री ने एनडीए नेताओं से सोच समझकर टिप्पणी करने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा, 'एनडीए के नेताओं को टिप्पणी के दौरान बचने और चुनाव के दौरान ज्यादा होशियारी बरतने की जरूरत है।

अररिया अब आतंकवाद का गढ़ बन जाएगा

अररिया अब आतंकवाद का गढ़ बन जाएगा

उनका इशारा बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और केंद्रीय मंत्री गिरिराज किशोर की ओर था। जिन्होंने चुनावों के समय भड़काऊ बयान दिए थे। चुनाव से पहले नित्यानंद राय ने कहा था कि अगर राजद का प्रत्याशी अररिया से चुनाव जीतता है तो पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के जासूसों के लिए यह जगह एक सुरक्षित जगह बन जाएगी। इसके अगले दिन अररिया में चुनाव था। जिसके बाद इस सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद इस सीट पर हारने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अररिया अब आतंकवाद का गढ़ बन जाएगा। इसे लेकर भी सिंह की कड़ी आलोचना हुई थी।

चुनाव के दौरान आरक्षण के खिलाफ बोलने से बचें

चुनाव के दौरान आरक्षण के खिलाफ बोलने से बचें

उन्होंने कहा, 'यह सबको पता है कि एनडीए प्रगति के लिए काम करता है। इस तथ्य के साथ ही थोड़ी होशियारी दिखाने की जरूरत है। नेताओं को ज्यादा होशियार रहने तथा विधानसभा चुनाव के दौरान आरक्षण के खिलाफ बोलने जैसी बड़ी गलतियों से बचने की जरूरत है।' वह 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नौकरियों के आरक्षण को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी की ओर इशारा कर रहे थे।

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