राम किशन ने बदल दी थी अपने गांव की तस्वीर, राष्ट्रपति ने किया था सम्मानित

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नई दिल्ली। बुधवार को दिल्ली में वन रैंक वन पेशन की मांग को लेकर खुदकुशी करने वाले राम किशन अपने गांव के लिए किसी हीरो से कम नहीं थे। उनके कामों के लिए राष्ट्रपति से भी सम्मान मिल चुका था।

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हरियाणा के भिवानी के गांव बामला के रहने वाले 70 साल के राम किशन ने बुधवार को मौत को गले लगा लिया। राम किशन ग्रेवाल ने मरने से पहले इसे सैनिकों के लिए उठाया गया एक कदम कहा।

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि मरने वाले की मानसिक स्थिति ठीक भी थी कि नहीं। राम किशन की मानसिक स्थिति पर सवाल उनके गांव वालों को जरूर चुभ रहा होगा। उसकी वजह राम किशन के काम हैं।

बोले वीके सिंह- ये नहीं पता कि आत्महत्या करने वाले सैनिक की मानसिक दशा क्या थी?

सेना से रिटायरमेंट के बाद बने गांव के सरपंच

2004 में 28 साल की नौकरी के बाद सेना से रिटायर होकर रामकिशन अपने गांव बामला आ गए। बामला आते ही उन्होंने गांव की समस्याओं को आधिकारियों के सामने उठाना शुरू कर दिया। रामकिशन की सक्रियता देख उन्हें सरपंच चुन लिया गया।

सरपंच रहते हुए राम किशन ग्रेवाल ने जो काम किए उससे गांव की तस्वीर ही बदल गई। राम किशन ने अपनी कोशिशों से गांव में लड़कियों के लिए अलग स्कूल खुलवाया।

राम किशन ने गांव में पानी और सफाई की समस्या पर काम किया। उन्होंने पानी की पाइपलाइन के जरिए गांव को पानी दिया। उन्होंने गां की सफाई के लिए भी बहुत काम किए।

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने दिया था पुरस्कार

2008 में तब की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उनको निर्मल ग्राम पुरस्कार से सम्मानित किया। निर्मल गांवो में बामला हरियाणा में पहले नंबर पर आया।

निर्मल ग्राम पुरस्कार भारत सरकार ने 2003 में शुरू किया था। ये पुरस्कार उन गांवो को दिया जाता है, जो एकदम स्वच्छ हों और पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हों।

राम किशन को अपने सामाजिक कामों के लिए शंकर दयाल शर्मा अवार्ड भी मिला। उन्हें 21वें आर्मी स्टाफ हेड जनरल निर्मल चंद्रा विज से भी प्रोत्साहन पत्र मिला।

राम किशन के बेटे बताते हैं कि पिताजी ने अधिकारियों से लगातार लड़कर गांव में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग बारहवीं तक के स्कूल बनवाए।

गांव के लोगों ने बताया कि उन्होने सरपंच रहते गांव का कायापलट किया। पिछले साल राम किशन जंतर मंतर पर पूर्व सैनिकों के वन रैंक वन पेंशन के लिए दिए जा रहे धरने का हिस्सा बने थे।

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English summary
Ram Kishan Grewal A man who changed the face of his village
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