राज्यसभा में हंगामे पर बोले उप सभापति- जो हुआ उस पर सभी दलों को आत्ममंथन की जरूरत
नई दिल्ली, 15 अगस्त। राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उच्च सदन में पिछले दिनों हुए हंगामे पर बोलते हुए कहा कि हम सदन में जो करते हैं उसे पूरा देश देखता है और इसका असर नीचे तक होता है। इसलिए सदस्यों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर दल को आत्ममंथन करना चाहिए ताकि हम उन आदर्शों को पा सकें जिसकी कल्पना हमारे संविधान निर्माताओं ने की थी।
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स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में भी सदन में हंगामे पर चिंता जताई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उप सभापति हरिवंश ने देश के पहले प्रधानमंत्री को याद करते हुए कहा पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद के संदर्भ में कहा था हम संसद में जो कुछ करते हैं उस पर बहुत गौर करने की जरूरत है। हमारा आचरण, हमारी मर्यादा, हमारी बातचीत का तौर तरीका नीचे पंचायतों तक पहुंचेगा। इसी से लोकतांत्रिक संस्कृति मजबूत होगा... आज हमें पंडित नेहरू के कथन को याद करना चाहिए और आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।"
सदन की गरिमा को किया याद
उच्च सदन की गरिमा और परंपरा को याद करते हुए उन्होंने कहा जब राज्य सभा की परिकल्पना की गई थी तो ये माना गया था कि इस सदन की जरूरत इसलिए है क्योंकि सीधे चुनाव में लोकसभा और विधानसभाओं में शायद ऐसे लोग चुनकर न आ पाएं जो बौद्धिक हैं, विचारवान है। इसलिए ऐसे लोगों को जो अपने क्षेत्रों के विशिष्ट हैं, वो आकर देश की समस्याओं पर विचार-विमर्श करें। ताकि देश को नई धारा मिले। लेकिन जो कुछ हुआ, हो रहा है, सभी राजनीतिक दलों को ऐसे इस पर विचार करने की जरूरत है ताकि हम उस परंपरा को प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा आज देश के लोग देख रहे हैं कि क्या हो रहा है। गांधी के देश में हम हम किस तरह का प्रतिनिधित्व दें और कैसे काम करें यह लोगों को तय करना है।












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