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पीएम मोदी ने एक भी पीएसयू नहीं बनाया, 23 का निजीकरण किया: राज्यसभा में कांग्रेस

नई दिल्ली, 03 फरवरी: संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा को 4 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है। इससे पहले गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद रिपुन बोरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने 23 का निजीकरण करते हुए एक भी सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (पीएसयू) नहीं बनाया है। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद ने इस मामले पर पिछले प्रधानमंत्रियों की तुलना पीएम मोदी से की और कहा कि राजीव गांधी ने 16 पीएसयू बनाए और कोई निजीकरण नहीं किया, अटल बिहारी वाजपेयी ने 17 पीएसयू बनाए और मनमोहन सिंह ने 23 सार्वजनिक उपक्रम बनाए और केवल तीन का निजीकरण किया।

Congresss MP Ripun Bora

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिया ये बयान

कांग्रेस सांसद ने कहा कि कोविड महामारी के चलते अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से तबाह हुई है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में आर्थिक परिदृश्य को कैसे ठीक किया जाए, इस पर कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे रोडमैप माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह लोगों की अपेक्षाओं के बिल्कुल विपरीत था, क्योंकि इसमें में ना तो तरीकों का उल्लेख किया गया था और न ही कोरोना दौरान नुकसान की नुकसार के उपायों के बारे में । बोरा ने कहा, "महामारी के दौरान 84 करोड़ लोगों की आय में भारी गिरावट आई थी लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण में कुछ भी उल्लेख नहीं था।"

नागालैंड हिंसा का भी उठाया मुद्दा

वहीं सांसद ने महंगाई पर मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि व्यक्तिगत खपत में भारी गिरावट के बावजूद राष्ट्रपति के अभिभाषण में मूल्य वृद्धि से निपटने के लिए एक भी शब्द का उल्लेख नहीं किया गया था"। बोरा ने सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) का मुद्दा उठाया और उल्लेख किया कि कैसे भारतीय सशस्त्र बलों ने पिछले साल 4 दिसंबर को नागालैंड के मोन जिले में घात लगाकर हमला किया और 17 कोयला खदानों में काम करने वालों को मार डाला। कांग्रेस नेता ने कहा कि आम तौर पर विदेशी आक्रमण के खिलाफ सेना का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हमारी सेना ने हमारे अपने लोगों को मार डाला है।

एनसीआरबी के आंकड़ों का दिया हवाला

इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि नागा शांति वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है। वहीं नेता ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर हम उनकी (एससी/एसटी लोगों) की रक्षा नहीं कर सकते तो सशक्तिकरण कहां है?

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