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राजू श्रीवास्तव की AIIMS में की गई Virtual Autopsy,क्या है यह प्रक्रिया ? जानिए

नई दिल्ली, 21 सितंबर: राजू श्रीवास्तव हंसाने की अपनी प्रतिभा के चलते आज करोड़ों दिलों को रुला कर चले गए हैं। लेकिन, दिवंगत आत्मा को आखिरी वक्त में सम्मानजनक तरीके से इस अलविदा करने का काम आगे बढ़ाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने उनकी वर्चुअल ऑटोप्सी की है। एम्स में यह टेक्नोलॉजी ज्यादा पुरानी नहीं है और इससे दिवंगत आत्मा के शरीर को सम्मान तो मिला ही है, उनके परिजनों के दुख में भी बढ़ोतरी नहीं होने दी गई है। आइए जानते हैं कि वर्चुअल ऑटोप्सी क्या है और यह फिजिकल पोस्ट-मॉर्टम से किस तरह से अलग है?

राजू श्रीवास्तव की वर्चुअल ऑटोप्सी हुई-एम्स

राजू श्रीवास्तव की वर्चुअल ऑटोप्सी हुई-एम्स

अपनी कॉमेडी से करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाले कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के पोस्ट-मॉर्टम के लिए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया को वर्चुअल ऑटोप्सी कहते हैं। एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है, 'राजू श्रीवास्तव का पोस्ट-मॉर्टन एक नई तकनीक से की गई है, जिसे वर्चुअल ऑटोप्सी कहते हैं। इसके लिए किसी चीरफाड़ की जरूरत नहीं होती। पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट लगते हैं, इसके बाद बॉडी को उनके परिवार को सौंप दिया गया।'

क्या है वर्चुअल ऑटोप्सी ?

क्या है वर्चुअल ऑटोप्सी ?

वर्चुअल ऑटोप्सी मूल रूप से एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मौत के बाद शव परीक्षण के लिए शरीर में ज्यादा चीरफाड़ की आवश्यकता ही खत्म हो जाती है। इसके लिए डेड बॉडी को पहले एक सीटी स्कैन मशीन में रखा जाता है। सीटी स्कैन में कुछ ही सेकंड में शव के करीब 25,000 तस्वीरें ले ली जाती हैं और फिर एक्सपर्ट उनका परीक्षण करते हैं। इसके माध्यम से एक्सपर्ट को पता चल जाता है कि शरीर के विभिन्न अंग किस स्थिति में हैं, मौत की वजह क्या है? आदि। यह ऑटोप्सी स्कैनिंग और इमेंजिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित होती है। इसमें सीटी स्कैन मशीन का इस्तेमाल करके विभिन्न ऊतकों और शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है।

फिजिकल पोस्ट-मॉर्टम से वर्चुअल ऑटोप्सी बेहतर क्यों है ?

फिजिकल पोस्ट-मॉर्टम से वर्चुअल ऑटोप्सी बेहतर क्यों है ?

सबसे बड़ी बात ये है कि वर्चुअल ऑटोप्सी में मृत शरीर को किसी तरह से काटने-चीड़ने की जरूरत खत्म हो जाती है और इस तरह से शव को सम्मानजनक हालत में ही परिवार को सौंपा जा सकता है। जबकि, फिजिकल ऑटोप्सी में शव की काफी चीरफाड़ करनी पड़ती है और वह पहले से शोक में डूबे परिवार वालों के लिए और भी ज्यादा असहनीय हो जाता है। यही नहीं रिसर्च के उद्देश्य से भी जो आवश्यकताएं होती हैं, वह भी वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से ही पूरी कर ली जाती हैं।

वर्चुअल ऑटोप्सी में समय की भी बचत होती है

वर्चुअल ऑटोप्सी में समय की भी बचत होती है

एम्स में वर्चुअल ऑटोप्सी की व्यवस्था 20 मार्च, 2021 से ही शुरू हई थी। जैसा कि डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि वर्चुअल ऑटोप्सी में जो मकसद चंद मिनटों में पूरा हो जाता है, उसी में परंपरागत ऑटोप्सी में 6 घंटे तक लग जाते हैं। इस तरह से नई तकनीक दिवंगत आत्मा के लिए काफी बेहतर तो है ही, शोक में डूबे परिजनों के लिए जले पर नमक छिड़कने जैसा भी नहीं है,जो कि परंपरागत तरीके में महसूस किया जाता है।

10 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट हुआ था

10 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट हुआ था

58 साल के लोकप्रिय कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव पिछले महीने जिम में कार्डियक अरेस्ट की वजह बेहोश हो गए थे और फिर दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया था। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उनका बुधवार सुबह 10.20 बजे निधन हो गया। वह पिछले 10 अगस्त से एम्स में भर्ती थे। पहले ही दिन एम्स में उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी और तब से वह वेंटिलेटर पर रखे गए थे।

2005 से मशहूर हुए थे गजोधर भैया

2005 से मशहूर हुए थे गजोधर भैया

जोधर भैया के नाम से मशहूर राजू श्रीवास्तव ने मनोरंजन की दुनिया में 1980 के दशक में ही कदम रख दिया था, लेकिन उनकी पहचान तब बनी, जब उन्होंने 2005 में 'द ग्रेट इंडिया लाफ्टर चैलेंज' में हिस्सा लिया। वह जितने दिन भी एम्स में कोमा में रहे, उनके चाहने वालों और उनके परिवार वालों को उनके अस्पताल से ठीक होकर लौटने की उम्मीद कभी नहीं टूटी। कई बार बीच में लगा कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है, लेकिन बुधवार को सुबह ऐसी खबर आई गई, जिसने करोड़ों दिलों को झकझोर कर रख दिया है।

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