'खता क्या की हमने, पता ही नहीं': उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने किस पर साधा निशाना?
उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने अपनी दिल की बात कहने के लिए अपनी ही लिखी कविता की कुछ पंक्तियां दोहराई हैं। दरअसल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके बार-बार के राजस्थान दौरे को लेकर सवाल उठाए थे। इसपर धनकड़ ने कहा है कि संविधान के ऊंचे पद पर बैठे लोगों को बेवजह की राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए।
हालांकि, उपराष्ट्रपति ने किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने जिस तरह से संवैधानिक पदों के लिए सम्मान की बात कही है, तो उसका इशारा समझ में आ रहा है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि आप यहां बार-बार क्यों आ रहे हैं....मैं ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से संवैधानिक पदों के लिए बयानों की उम्मीद नहीं करता।'

संवैधानिक पदों के लिए आदर होना ही चाहिए- उपराष्ट्रपति धनकड़
उन्होंने आगे कहा, 'यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। संवैधानिक पदों के लिए आदर होना ही चाहिए.....और हम सबको एकजुटता के साथ, हाथ से हाथ मिलाकर, सहयोग और तालमेल के साथ, आपसी सहमति वाले नजरिए से आखिरकार लोगों की ही सेवा करनी है....' उन्होंने राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ में मोदी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को संबोधन में ये बातें कही हैं।
हम सब देश के सेवक हैं- जगदीप धनकड़
दरअसल, धनकड़ के राजस्थान दौरे को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कई बार सवाल खड़े किए हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा है, 'यह हमारा देश है, चाहे हमारा जो भी पद हो, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक हम सब देश के सेवक हैं। हमें बहुत ही संवेदनशील रहना है, हमें जनता में ऐसी धारणा नहीं बननी देनी चाहिए कि संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति बेवजह की राजनीति में घसीट लिया जाए, यह सही नहीं है।'
'क्या जुल्म है? पता ही नहीं!'
अपनी बातों को रखने के लिए उपराष्ट्रपति ने अपनी ही लिखी एक कविता की कुछ पंक्तियां भी पढ़ी हैं-
'खता क्या की हमने, पता ही नहीं!
आपत्ति क्यों हुई उन्हें हमारे घर आने की, पता ही नहीं!
ये कैसा मंजर है, समझ से परे है,
सवालिया निशान क्यों है अपने घर आने में,
क्या जुल्म है? पता ही नहीं!'
गौरतलब है कि सितंबर में जयपुर में एक कार्यक्रम में सीएम गहलोत ने कहा था, 'उपराष्ट्रपति अप-डाउन करते रहते हैं (दिल्ली और राजस्थान)। चाहे गवर्नर हों या उपराष्ट्रपति, हम उनका सम्मान करते हैं.....लेकिन यहां चुनाव है....'
27 सितंबर को मुख्यमंत्री ने कहा, 'राजनेताओं को आना चाहिए, लेकिन कृप्या उपराष्ट्रपति को नहीं भेजें, यह संवैधानिक पद है। हम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का सम्मान करते हैं। कल उपराष्ट्रपति आए और पांच जिलों में गए। क्या इसका कोई लॉजिक है? यह चुनाव का समय है। अगर आप अब आते हैं तो इससे सभी तरह का संदेश जाएगा, जो कि लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।' (इनपुट-एएनआई)
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