Rajasthan Political Crisis: आधी रात तक चली कैबिनेट मीटिंग, बहुमत साबित करने की जिद पर अड़े CM गहलोत
जयपुर। राजस्थान में जारी राजनीतिक घमासान के बीच जयपुर में मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक कैबिनेट बैठक हुई। करीब 2 घंटे 20 मिनट तक चले इस बैठक में सीएम गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने पर अड़े रहने की बात की है। वह बहुमत साबित करने की जिद पर अड़े हैं। राज्यपाल कलराज मिश्र ने अभी कोरोना संकट का हवाला देते हुए इनकार कर दिया है। राजयपाल की तरफ से कहा गया है कि 23 जुलाई की रात को राज्य सरकार ने शॉर्ट नोटिस पर विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए एक पेपर प्रस्तुत किया था।
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पेपर का विश्लेषण किया गया और कानूनी विशेषज्ञों से इस पर सलाह ली गई थी। शॉर्ट नोटिस पर सत्र आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है और न ही इसके लिए कोई एजेंडा प्रस्तावित किया गया है। सामान्य प्रक्रियाओं के अनुसार सत्र के लिए 21 दिन के नोटिस की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार को सभी विधायकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए। कलराज मिश्र ने पत्र लिखकर सीएम अशोक गहलोत से कहा, 'इससे पहले कि मैं विधानसभा सत्र के संबंध में विशेषज्ञों से चर्चा करता, आपने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि राजभवन घेराव होता है तो यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है।
यदि आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकता तो राज्य में कानून-व्यवस्था का क्या होगा? राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? मैंने कभी किसी सीएम का ऐसा बयान नहीं सुना। क्या यह एक गलत प्रवृत्ति की शुरुआत नहीं है, जहां विधायक राजभवन में विरोध प्रदर्शन करते हैं? इसके बाद कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी विधायकों को आश्वासन दिया है कि वह संविधान के अनुच्छेद 174 के अनुरूप ही कदम उठाएंगे। उक्त अनुच्छेद राज्य विधानसभा का सत्र आहूत करने में राज्यपाल की भूमिका से जुड़ा है।
हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के त्यागपत्र की मांग की
राजस्थान में जारी राजनीतिक रस्साकशी के बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के त्यागपत्र की मांग की। बेनीवाल ने ट्वीट किया है, ''मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा आज राजभवन पर उँगली उठाई गई जो पूर्ण रूप से अनुचित और अलोकतांत्रिक है। मुख्यमंत्री को नैतिकता के नाते स्वयं आगे आकर त्यागपत्र दे देना चाहिए।''












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