धर्म परिवर्तन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डीएम से लेनी होगी अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के जज गोपालकृषण ने लव जेहाद के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक राज्य में धर्म परिवर्तन से संबंधित कोई कानून नहीं बन जाए तबतक हाईकोर्ट का ये निर्देश लागू रहेगा।

नई दिल्ली। राजस्थान हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब धर्म परिवर्तन के लिए जिला कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। फैसले के मुताबिक, जिला कलेक्टर की अनुमति मिलने के बाद ही धर्म परिवर्तन किया जा सकेगा। अदालत ने ये फैसला हिंदू युवती के धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से निकाह करने के मामले में सुनाया है। अदालत ने इसको लेकर दस बिन्दुओं का दिशा-निर्देश भी जारी किया है।

लव जेहाद के मामले में फैसला

लव जेहाद के मामले में फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के जज गोपालकृषण ने लव जेहाद के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक राज्य में धर्म परिवर्तन से संबंधित कोई कानून नहीं बन जाए तबतक हाईकोर्ट का ये निर्देश लागू रहेगा। जोधपुर में एक परिवार ने लवजिहाद का आरोप लगाते हुए एक मुस्लिम लड़के पर अपनी लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कर शादी करने का आरोप लगाया था। तब हाईकोर्ट ने लड़की को सरकारी नारी निकेतन में भेजते हुए राज्य सरकार से कहा था कि किसी के लिए भी धर्म परिवर्तन करना मजाक बन गया है। आपके इसके लिए क्या नियम है बताएं। राज्य सरकार ने कोर्ट को जवाब दिया था कि उसने विधेयक बना लिया है जिसकी मंजूरी के लिए गृहमंत्रालय के जरीए राष्ट्रपति को भेजा है।

कलेक्टर की अनुमति जरूरी

कलेक्टर की अनुमति जरूरी

इस मामले में लड़की ने कहा कि वो खुद की मर्जी से शादी कर रही है और किसी की दखलंदाजी नहीं चाहती हैं। तब कोर्ट को लड़की को लड़के के साथ भेजना पड़ा था। इस फैसले के बाद अब किसी भी लड़की-लड़के की धर्म परिवर्तन कर शादी आसान नहीं होगा, क्योंकि जबतक कलेक्टर अनुमति नहीं देता तबतक धर्म परिवर्तन को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। इस बारे में अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने कहा कि माननीय हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर दस बिंदू के निर्देश दिए हैं जो जबतक राज्य सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर कानून नहीं बना लेती तबतक लागू रहेगा।

 महज शपथ पत्र देकर ही कोई धर्म नहीं बदल सकेगा

महज शपथ पत्र देकर ही कोई धर्म नहीं बदल सकेगा

सुनवाई के दौरान जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास और जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि महज शपथ पत्र देकर ही कोई धर्म नहीं बदल सकेगा, जिला कलेक्टर की अनुमति आवश्यक होगी। अब जब तक प्रदेश सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती, तब तक हाईकोर्ट का यह दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेगा। बहस के दौरान शिव कुमार व्यास ने कोर्ट में बताया कि सरकार ने धर्म परिवर्तन को लेकर बिल बनाया था, वह राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।

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