RAJASTHAN BYPOLL: करारी हार के बाद पार्टी नेताओं ने वसुंधरा राजे से मांगा इस्तीफा, अमित शाह को लिखी चिट्ठी
नई दिल्ली। राजस्थान के उपचुनाव में मिली करारी हार ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी के एक वर्ग ने वसुंधरा राजे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। कोटा जिला ओबीसी सेल के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखे पत्र में वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष बताया है।

उपचुनाव में हार का साइड-इफेक्ट
कोटा जिला ओबीसी सेल के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने इस पत्र में कहा है कि वसुंधरा राजे ने पार्टी को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां से अब हार टालना नामुमकिन है। किसान, कर्मचारी, मजदूर समेत समाज का हर वर्ग सरकार के कामकाज से नाराज है। सभी कार्यकर्ता पार्टी नेतृत्व में तुरंत बदलाव चाहते हैं और उन्होंने लिखा कि, मैं खुद चाहता हूं कि वसुंधरा राजे और अशोक परनामी को तुरंत पद से हटाया जाए।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखा पत्र
इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजस्ठान में हुए तीन उपचुनाव में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। लोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट पर पार्टी की करारी हार हुई है। अजमेर सीट पार्टी करीब 85 हजार और अलवर लोकसभा सीट करीब दो लाख वोटों के भारी अंतर से हारी है। इसके अलावा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर भी करीब 13 हजार वोटों से हार हुई है।

हाल ही में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने मारी बाजी
इन नतीजों से कांग्रेस पार्टी काफी उत्साहित है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि उपचुनाव के ये परिणाम वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ जनादेश है। वसुंधरा राजे ने खुद इस हार को गंभीरता से लेते हुए इसे पार्टी के लिए एक चेतावनी भरा संकेत बताया है और पार्टी कार्यकर्ताओं से और अधिक मेहनत करने को कहा था।

उपचुनाव के नतीजों से बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व भी चिंतित
पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी राजस्थान के चुनाव परिणामों से चिंतित है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि राजस्थान के चुनाव परिणाम हमारे लिए चिंता का विषय हैं और हम पार्टी के अंदर इसकी समीक्षा करेंगे। हालांकि महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इन चुनाव परिणाम को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनादेश मानने से साफ इनकार किया था। उनका मानना है कि इस हार के पीछे स्थानीय कारण ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।












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