राहुल और प्रियंका गांधी की पीएम मोदी के नेतृत्व से नहीं की जा सकती तुलना-शिवसेना
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के गठबंधन के दो दिन बाद शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। शिवसेना ने बुधवार को पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते करते हुए कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की इससे तुलना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि साल 2014 की तुलना में राहुल गांधी में सुधार हुआ है और इसमें उन्हें उनकी बहन प्रियंका गांधी की भी मदद मिल रही है। गौरतलब है कि गठबंधन के ऐलान से पहले शिवसेना ने पीएम मोदी की कई बार विभिन्न मामलों पर आलोचना की थी।

'राहुल-प्रियंका की पीएम मोदी से तुलना नहीं'
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में विपक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा कि लोगों के मन में गठबंधन को लेकर सवाल कम हैं। लेकिन राजनीतिक विरोधियों के दिमाग में अधिक सवाल हैं क्योंकि इस गठबंधन की वजह से कीड़े- मकोड़े कुचले जाएंगे। पीएम मोदी के नेतृत्व का संदर्भ देते हुए शिवसेना ने कहा,'2014 की तुलना में राहुल गांधी में सुधार हुआ है। उन्हें उनकी बहन प्रियंका की भी मदद मिल रही है। हालांकि, इसकी तुलना मोदी के नेतृत्व से नहीं की जा सकती।'

'गठबंधन की वजह बताई'
पार्टी के सत्ता के लिए असहाय नहीं होने पर जोर देते हुए सामना के संपादकीय में कहा गया है कि कई सवाल हैं, जैसे 2014 में मतभेदों के बावजूद बीजेपी के साथ क्यों रहे, क्या राम मंदिर बनेगा, क्या शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा और इन सवालों का सकारात्मक है। गठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब देने से बेहतर होगा कि महाराष्ट्र के फायदे के लिए बनाई गई व्यवस्था आगे ले जाई जाए। मराठी दैनिक सामना में आगे कहा गया कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह खुद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री आए। ठाकरे ने उनके सामने अपना पक्ष रखा और आखिरकार गठबंधन को एक और मौका देने का फैसला लिया गया।

'शिवसेना और भाजपा में दुश्मनी नहीं'
शिवसेना ने सामना में लिखा कि हमारी पार्टी और भाजपा में कोई शत्रुता नहीं है। अगर बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार मोदी से वैचारिक मतभेदों के बावजूद एनडीए से जुड़ सकते हैं और अगर कांग्रेस महागठबंधन बना सकती है। फिर तो शिवसेना एनडीए का हिस्सा हमेशा से ही रही है। शिवसेना ने आगे कहा कि साल 2014 के लोकसभा के समय में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को लेकर गुस्सा था और नरेंद्र मोदी के समर्थन में लहर थी। हालांकि 2019 में यह लहर कुछ कम हो गई है, लेकिन इस बार का चुनाव लहर पर नहीं बल्कि विचारधारा, विकास के कार्यों और भविष्य पर लड़ा जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का निर्णय किया है। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटों में से 25 पर भाजपा और 23 पर शिवसेना लड़ेगी। वहीं साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में वो बराबर सीटों पर चुनाव लडे़गी। महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटें है।












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