लोकसभा चुनाव 2019: राहुल गांधी का 'सुपरस्ट्रोक', 'ट्रंप कार्ड' से नरेंद्र मोदी को मात
2014 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी की जीत में सोशल मीडिया पर चलाए गए कैंपेन की अहम भूमिका रही थी। अब कांग्रेस भी इसी एजेंडे पर आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है।
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नई दिल्ली। जो फार्मूला अपनाकर डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव में जीत हासिल की उसी फार्मूले के साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 2019 की चुनावी जंग जीतने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल गांधी को ये भरोसा है कि वो भारत में 'ट्रंप कार्ड' खेलकर 2019 की चुनावी जंग जीत जाएंगे। राहुल गांधी अब एक अमेरिकी एजेंसी की मदद लेने जा रहे हैं जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को जितवाने में अहम भूमिका निभाई थी। राहुल गांधी अमेरिका के दो सप्ताह लंबे दौरे पर गए थे। अमेरिकी कंपनी से संपर्क भी उनके इसी दौरे का हिस्सा माना जा रहा है।

राहुल गांधी का ब्रह्मास्त्र
2014 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी की जीत में सोशल मीडिया पर चलाए गए कैंपेन की अहम भूमिका रही थी। अब कांग्रेस भी इसी एजेंडे पर आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक कांग्रेस कैंब्रिज ऐनालिटिका नाम की एजेंसी के संपर्क में है। यह एजेंसी इंटरनेट डेटा का विश्लेषण करके चुनावी रणनीति बनाने में मदद करती है। कैंब्रिज ऐनालिटिका डाटा विश्लेषण की माहिर कंपनी है। ये कंपनी सोशल मीडिया और इंटरनेट के आंकड़ों का अध्ययन कर यह पता लगाती है कि लोगों के लिए मुद्दे क्या हैं? उनकी पसंद-नापसंद क्या क्या है? डाटा एनालिसिस के लिए ये कंपनी सोशल मीडिया, आॉनलाइन सर्च, ईमेल, और शॉपिंग वेबसाइट को खंगालती है। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कंपनी के एक्सपर्ट को कंजूमर बिहैवियर की सटीक जानकारी मिलती है, फिर वो ये तय करते हैं कि किसी खास चुनाव में लोगों का एजेंडा क्या है?

अमेरिकी कंपनी ने दिया प्रजेंटेशन
खबरों के मुताबिक कैंब्रिज ऐनालिटिका के सीईओ अलेग्जेंडर निक्स ने अगले लोकसभा चुनाव में यूपीए के लिए चुनावी रणनीति बनाने के सिलसिले में विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की है। कंपनी ने कांग्रेस को ऑनलाइन वोटरों को साधने की रणनीति पर एक प्रेजेंटशन भी दिया है।

डाटा विश्लेषण की माहिर कंपनी
कैंब्रिज एनालिटिका अमेरिकी चुनाव के अलावा ब्रेजिक्ट पोल के दौरान भी अपने डाटा एनालिटिक्स का करिश्मा दिखा चुकी है। ऐनालिटिका ने ब्रेग्जिट के पक्ष में कैंपेन चलाया था जिस पर ब्रिटेन की जनता ने भी मुहर लगाई। दुनियाभर की कई राजनीतिक पार्टियां इस कंपनी की मदद ले रही हैं।












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