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Rahul Gandhi के ऊपर से विशेषाधिकार हनन का खतरा टला, फिर भी कैसे जा सकती है सदस्यता? क्या है सब्सटेंटिव मोशन

Rahul Gandhi Privilege Motion: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक हालिया भाषण को लेकर संसद के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। हालांकि अब यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस नहीं देगी, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा।

बीजेपी उनके भाषण के कथित आपत्तिजनक अंशों को हटाने और आगे की संसदीय कार्रवाई पर अब भी अड़ी हुई है, जिससे राहुल गांधी की सदस्यता पर संकट की आशंका बनी हुई है।

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Rahul Gandhi Substantive Motion: विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं, लेकिन खतरा कायम

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल नहीं किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब उनके भाषण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार तीखी बहस चल रही है। हालांकि, बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि वह राहुल गांधी के भाषण में इस्तेमाल की गई भाषा और लगाए गए आरोपों को किसी भी सूरत में नजर अंदाज नहीं करेगी।

बीजेपी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने लोकसभा सचिवालय को औपचारिक नोटिस देकर मांग की है कि राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से पूरी तरह हटाया जाए। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने बजट चर्चा के दौरान ऐसे आरोप लगाए, जो संसदीय मर्यादा और नियमों के खिलाफ हैं।

Rahul Gandhi को लेकर क्या है विवाद की असली जड़?

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप है कि कि राहुल गांधी ने विदेशी ताकतों (जैसे जॉर्ज सोरोस) के इशारे पर सदन को गुमराह किया है और प्रधानमंत्री के खिलाफ भी बिना किसी आधार के गंभीर आरोप लगाए हैं।लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी के भाषण के कुछ अंश पहले ही रिकॉर्ड से हटा दिए थे, लेकिन बीजेपी इसे अपर्याप्त कार्रवाई मान रही है।

इसी वजह से अलग से नोटिस देकर अतिरिक्त हिस्सों को हटाने की मांग की गई है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जनता का सरेंडर करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं, जिससे भारतीय किसानों और डेटा सुरक्षा को खतरा है।

What Is Substantive Motion: क्या है 'सब्सटेंटिव मोशन' BJP ने चला मास्टर स्ट्रोक

शुरुआत में चर्चा थी कि बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ 'विशेषाधिकार हनन' का नोटिस देगी। लेकिन बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने गुरुवार, 12 फरवरी को एक बड़ा कदम उठाते हुए 'सब्सटेंटिव मोशन' (Substantive Motion) पेश कर दिया। इसके साथ ही निशिकांत दुबे ने मांग की है कि राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की जाए और उन पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए।

Substantive Motion विशेषाधिकार हनन से कहीं अधिक गंभीर प्रक्रिया है। इसके जरिए किसी सदस्य के आचरण पर सीधे सवाल उठाए जाते हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा होगी और मतदान कराया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि विशेषाधिकार हनन का नोटिस न होने के बावजूद राहुल गांधी के लिए खतरा पूरी तरह टला नहीं माना जा रहा।

संसद में बढ़ता टकराव, कार्यवाही बार-बार बाधित

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में संसद के भीतर माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में कुछ वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि कांग्रेस सांसदों ने 4 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में घुसकर अनुचित व्यवहार किया। कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और ध्यान भटकाने वाला कदम बताया है। इसके साथ ही, लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ पहले से ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और गहरा गया है।

कांग्रेस का पलटवार: 'दोहरा मापदंड'

बीजेपी की कार्रवाई पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार का रवैया दोहरे मापदंड वाला है। उन्होंने कहा, राहुल गांधी के शब्दों को कार्यवाही से हटा दिया गया, लेकिन जब यही बातें दूसरे नेता कहते हैं, तो उन्हें रहने दिया जाता है। पिछली बार राहुल गांधी की सदस्यता ले ली गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें पहले से भी बड़े जनादेश के साथ वापस भेजा। वेणुगोपाल ने आगे कहा, हमें किसी नोटिस से फर्क नहीं पड़ता। चाहो तो हमें फांसी पर लटका दो।"

भले ही बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने से फिलहाल कदम पीछे खींच लिया हो, लेकिन Substantive Motion, भाषण से अंश हटाने की मांग और लगातार बढ़ता संसदीय टकराव यह संकेत देता है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला यह तय करेगा कि यह मामला राहुल गांधी की सदस्यता तक पहुंचेगा या नहीं।

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