Raghav Chaddha और उनकी टीम का BJP में शामिल होना 2024 में ही तय हो गया था, अमित शाह ने की थी सीक्रेट प्लानिंग!

Raghav Chaddha and Aap Mla switch BJP: आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा समेत कई नेताओं का एक साथ पार्टी छोड़ना और उनमें से कुछ का भाजपा में शामिल होना निश्चित रूप से हैरान कर देने वाला था। हाालांकि एक साथ AAP के सात सांसदों का एक ही दिन में पार्टी छोड़ना भले ही नाटकीय लग रहा हो, लेकिन इसकी ज़मीन महीनों पहले ही तैयार हो चुकी थी।

अमित शाह ने लिख ली थी 'दल-बदल' की स्क्रिप्‍ट

शुक्रवार को जो घटनाक्रम हुआ जो अचानक लगा, वह वास्तव में एक लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था। इसकी जड़ें पंजाब और विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक यात्रा से जुड़ी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 में ही इस 'दल-बदल' की स्क्रिप्‍ट लिख ली थी जिसकी अगुवाई राघव चड्ढा ने की थी।

Raghav Chadha

2024 में अमित शाह ने कर ली थी ये सीक्रेट प्‍लानिंग

एचटी रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने 'आप' के नाराज़ सांसदों को अपने पाले में लेने का फैसला अमित शाह के 14 मार्च को पंजाब के मोगा में हुई 'बदलाव रैली' के आसपास ही कर लिया था। अब इस रैली को दलबदल की इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

सांसदों की नाराजगी ने दिया भाजपा को खेला करने का मौका

यह घटनाक्रम 2024 में दो महत्वपूर्ण मोड़ों के साथ शुरू हुआ था जब दो समानांतर घटनाक्रम आकार लेने लगे थे। एक तरफ दिल्ली चुनावों की तैयारियां तेज़ी पकड़ रही थीं, वहीं दूसरी तरफ 'आप' के कुछ नेताओं के बीच पंजाब सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ने लगा था। कुछ 'आप' नेता अपनी पंजाब सरकार के कामकाज से नाखुश थे। इस्तीफ़ा देने वाले सात सांसदों में से छह इसी राज्य से हैं।

राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाना AAP को पड़ा भारी

हालांकि, ये दरारें इसी महीने 2 अप्रैल को तब ज़्यादा स्पष्ट हो गईं, जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया। पार्टी ने उन पर मुख्य मुद्दे न उठाने और "नरम मुद्दों" पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाया था। अशोक मित्तल को आंशिक तौर पर उनकी जगह दी गई, लेकिन इस बदलाव से स्थिति को संभालने में ज़्यादा मदद नहीं मिली - बल्कि मित्तल खुद उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने शुक्रवार को पाला बदल लिया।

बीजेपी में शामिल हुए बड़े चेहरे, पंजाब पर नजर

राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को पार्टी प्रमुख नितिन नवीन की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल कराया गया। हालांकि, 2027 के पंजाब चुनावों में इससे कितना फायदा मिलेगा, इस पर अभी संशय बना हुआ है।

रणनीतिकार से हाशिए पर संदीप पाठक

आईआईटी पृष्ठभूमि वाले संदीप पाठक, जो कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रणनीतिकार थे, ने पंजाब, हिमाचल और गुजरात चुनावों में अहम भूमिका निभाई। लेकिन दिल्ली चुनावों तक आते-आते उनकी जिम्मेदारियां कम कर दी गईं और नए सलाहकारों के प्रभाव बढ़ने लगे।

आंतरिक असंतोष और नेतृत्व पर सवाल

पाठक का असंतोष पार्टी के भीतर अकेला नहीं था। संजय सिंह के नेतृत्व वाले संसदीय दल में भी मतभेद उभरे। राज्यसभा सांसदों ने रणनीति और मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने की शिकायत की।

संसद में 'फ्री हैंड' और बढ़ती दूरी

कई सांसद खुद को "स्वतंत्र एजेंट" की तरह काम करते हुए देख रहे थे। हरभजन सिंह ने भी माना कि उन्हें पार्टी लाइन के बजाय अपनी मर्जी से मुद्दे उठाने पड़ते थे।

अशोक मित्तल का कदम और संकेत

राज्यसभा में उपनेता के लिए चुने गए अशोक मित्तल का बीजेपी में जाना इस बात का संकेत है कि केजरीवाल नेतृत्व पार्टी के अंदर बढ़ते मतभेदों को समय रहते भांप नहीं पाया।

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