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सुसाइड नोट में नाम होने से व्यक्ति को नहीं माना जा सकता अपराधी: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

By Akansha Singh
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    चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट में नाम होने से किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता है। कोर्ट का कहना है कि सुसाइड नोट में नाम के साथ-साथ आत्महत्या के लिए उकसाने की असली वजह भी सामने आनी उतनी ही जरूरी है। हाईकोर्ट ने ये बातें गुड़गांव के एक मैनेजर की आत्महत्या मामले में कहीं। इस केस में मैनेजर इकबाल आसिफ ने आत्महत्या कर ली थी और चार वकीलों और कंपनी के दो कर्मचारियों पर सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।

    High Court

    पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सुसाइड मामलों पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट का कहना है कि सुसाइड नोट में नाम मिलने से व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता। इसके लिए उसके पीछे की आपराधिक मंशा जानने की भी जरूरत है। ये जानना जरूरी है कि आखिर उसने क्यों किसी को आत्महत्या के लिए उकसाया। जस्टिस पीबी बजांतरी ने कहा, 'क्योंकि एक व्यक्ति जिसने आत्महत्या की है और उसने सुसाइड नोट छोड़ा है, इसका मतलब ये नहीं है कि तुरंत निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है कि सेक्शन 306 के तहत वो अपराधी है।'

    जस्टिस बजांतरी ने कहा कि ये देखना और जांचना जरूरी है कि सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए उकसाने की क्या बातें लिखी गई हैं। बता दें कि कोर्ट ने टिप्पणी साल 2011 के आत्महत्या मामले में की। साल 2011 में गुड़गांव की एक कंपनी के मैनेजर इकबाल आसिफ ने आत्महत्या कर ली थी। आसिफ ने अपने सुसाइड नोट में चार वकीलों और कंपनी के दो कर्मचारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। गुरुग्राम पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दाखिल की थी, जिसके बाद आरोपियों हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी।

    हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि जांच कर रही पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। कोर्ट ने जजमेंट में कहा कि सुसाइड नोट और परिस्थियों का जांचना बहुत जरूरी है। 'किसी अन्य व्यक्ति को एक कमजोर और बेवकूफ शख्स के लिए गलत फैसले के कारण जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सभी परिस्थियों को जानना जरूरी है, जैसे जब प्यार में असफल व्यक्ति, परीक्षा में फेल होने वाला छात्र या कोई क्लाइंट आत्महत्या करता है तो सामने वाले व्यक्ति को सुसाइड के लिए उकसाने का आरोपी नहीं बनाया जा सकता।'

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    English summary
    Punjab And Haryana High Court Says That A Person Cannot Be Charged For Abetment Even After His Name Is On Suicide Note.

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