लोकसभा चुनाव 2019: रामपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट पर अभी भाजपा के नेपाल सिंह सांसद हैं। डॉ. नेपाल सिंह ने 2014 के चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी नसीर खान को हराकर ये सीट जीती थी। नेपाल सिंह और सपा नेता नसीर खान के बीच जीत का अंतर दो प्रतिशत वोटों का रहा था। रामपुर उत्तर प्रदेश लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों में सातवां स्थान रखता है।

रामपुर के वर्तमान सांसद डॉ नेपाल सिंह माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी रहे हैं और अभी वो पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के सदस्य हैं, उनकी पिछले पांच सालों में लोकसभा में उपस्थिति में 89 प्रतिशत रही और उन्होंने संसद सत्र में मात्र 38 सवाल पूछे हैं और 20 डिबेट में हिस्सा लिया है।
रामपुर लोकसभा सीट के इतिहास की बात करें तो 1957 और 1962 के चुनावों में कांग्रेस के राजा सईद अहमद मेंहदी यहां से जीते थे। इसके बाद कांग्रेस के ही जुल्फिकार अली खान यहां पर सांसद चुने गए। 1977 में इस सीट से भारतीय लोक दल के राजेंद्र कुमार शर्मा विजयी हुए थे। इसके बाद फिर से यहां की कमान कांग्रेस के हाथ में आ गई थी। साल 1991 में फिर से राजेंद्र कुमार शर्मा फिर से सांसद बने लेकिन इस बार वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 1998 में भाजपा के मुख़्तार अब्बास नकवी ने रामपुर लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की। साल 2004 में हुए लोकसभा चुनावों में अभिनेत्री और जयाप्रदा सपा के टिकट पर यहां से जीतीं। 2009 में वो फिर से यहां चुनाव जीतीं।
रामपुर की 45 प्रतिशत आबादी हिंदू और 50 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है, रामपुर की साक्षरता दर 53.34% है। साल 2014 के चुनाव में 1616972 वोटरों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 53 प्रतिशत पुरुष और 46 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।
मध्यकालीन इतिहास के मुताबिक, रामपुर कभी दिल्ली का भाग हुआ करता और बदौन और संभल में बंटा हुआ था। 1775 में नवाब फैज़ुल्लाह खान ने रामपुर किले की नीवं रखी थी और इस तरह रामपुर नगर का निर्माण हुआ। यह जिला कई तरह के उद्योग की वजह से भी जाना जाता है, यहां के रामपुर राजा पुस्तकालय में 12,000 से ज्यादा दुर्लभ मनुस्मृतिया और मुग़ल लघु चित्रों का संग्रहालय है।












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