लोकसभा चुनाव 2019: मालदा उत्तर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मालदा उत्तर सीट से कांग्रेस पार्टी की सीट पर मौसम नूर दो बार सांसद रह चुकी हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें 388609 वोट मिले थे। वहीं, दूसरे नंबर पर रहे थे सीपीएम के खागेन मूर्मू जिन्हें 322904 वोट मिले थे और कांग्रेस यहां से 65705 वोटों से जीत गई थी। 23 लाख से ज्यादा 23 लाख की ज्यादा से आबादी वाले शहर में 82 फ़ीसदी मतदान हुआ था। 18 मई 2014 को मौसम नूर ने लोकसभा में अपने सांसद पद की शपथ ली थी उसके बाद से दिसंबर 2018 तक वह 9 डिबेट्स में हिस्सा ले चुकी हैं। वहीं, उन्होंने कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल पार्लियामेंट के पटल पर नहीं रखा है। अभी तक वह 227 सवाल पूछ चुकी हैं। वहीं संसद में उनकी मौजूदगी 47 फ़ीसदी रही है।

2009 में यहां से जनता ने वोट दिया कांग्रेस की मौसम नूर को। 2014 में भी वह कांग्रेस की सीट से चुनाव जीती। लेकिन अब कांग्रेस पार्टी को लगा एक बड़ा झटका। क्योंकि 27 जनवरी 2019 को मौसम नूर ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और थाम लिया है ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का दामन। कांग्रेस के लिए ये एक बड़ा झटका इसलिए भी है क्योंकि एक सेटिंग एमपी के जाने का मतलब है हार। आने वाले समय में कांग्रेस की राह यहां से आसान नहीं होने वाली। वहीं,भारतीय जनता पार्टी भी यहां पर नजर लगाए बैठी है और सीपीआई तो पहले से ही चाहती है कि जीत उनकी हो। देखना होगा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता किसे यहां से अपना नेता मानती है और यहां से लोकसभा किसे भेजती है।
इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाए तो पता चलेगा माल्दा सीट, में कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां लेफ्ट से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक का जादू नहीं चल पाया है। साल 1980 से 2005 तक कांग्रेस नेता गनी खान चौधरी मालदा इलाके से चुनकर लोकसभा पहुंचते रहे हैं। 2005 में चौधरी के निधन के बाद से उनका परिवार यहां की राजनीति में उतरा। अभी तक उत्तर मालदा सीट से गनी खान चौधरी की भतीजी मौसम नूर कांग्रेस से सांसद थी। दूसरी सीट से दक्षिण मालदा सीट से उनके भाई अबु हासेमखान चौधरी कांग्रेस से सांसद हैं। ऐसे में मौसम नूर को ममता बनर्जी अपने पाले में लाकर बड़ी कामयाबी हासिल की हैं, वहीं, कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है।












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