देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत का प्रोफाइल, जानिए उनके बारे में सब कुछ

नई दिल्‍ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ यानी सीडीएस होंगे। सूत्रों की ओर से सोमवार को इस बात की पुष्टि कर दी गई है। जनरल रावत 31 दिसंबर को बतौर आर्मी चीफ रिटायर हो रहे हैं। जनरल रावत देश के ऐसे आर्मी चीफ रहे हैं जिन्‍होंने पहले 2015 और फिर केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से 24 दिसंबर को हुई एक मीटिंग में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। सीडीएस एक फोर स्‍टार जनरल होगा जो रक्षा मंत्रालय में मिलिट्री मामलों से जुड़े एक विभाग का मुखिया होगा। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्‍टाफ (आईडीएस) के मुखिया रहे लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सतीश दुआ ने सीडीएस की नियुक्ति को देश की सेनाओं के लिए कभी न भूलने वाला पल बताया है।

परिवार में रही देश सेवा की परंपरा

परिवार में रही देश सेवा की परंपरा

जनरल रावत सीडीएस के तौर पर फोर स्‍टार जनरल होंगे। उनके परिवार में हमेशा से देश सेवा की परंपरा रही है। जनरल रावत के पिता भी आर्मी ऑफिसर थे और बतौर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर हुए। उनकी पढ़ाई हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित सेंट एडवर्ड स्कूल और देहरादून के कैमबेरियन हॉल स्‍कूल में हुई। इसके बाद उन्‍होंने उसके बाद पुणे के खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) और फिर साल 1978 में वह इंडियन मिलिट्री एकेडमी, से पास आउट हुए और यहां पर उन्‍हें स्वोर्ड ऑफ ऑनर जैसा सम्‍मान भी मिला।

पिता की यूनिट में मिली पहली पोस्टिंग

पिता की यूनिट में मिली पहली पोस्टिंग

दिसंबर 1978 में बिपिन रावत उसी गोरखा राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशंड हुए जो कभी उनके पिता की यूनिट हुआ करती थी। बतौर लेफ्टिनेंट उनका सफर शुरू हुआ और इस सफर में वह आर्मी चीफ के पद और अब सीडीएस के पद तक पहुंचे। जनरल रावत, मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड टू में रहे। लॉजिस्टिक स्टाफ ऑफिसर, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी, डिप्‍टी मिलिट्री सेक्रेटरी, जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर जैसे कई पदों पर वह सेना में रहे। जनरल रावत सदर्न आर्मी कमांड के मुखिया भी रह चुके हैं।

जून 2015 में की सर्जिकल स्‍ट्राइक में अहम रोल

जून 2015 में की सर्जिकल स्‍ट्राइक में अहम रोल

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को ऊंची चोटियों की लड़ाई में महारत हासिल है और आतंकवाद व उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए उन्होंने कई ऑपरेशन चलाए हैं। साल 2015 में मणिपुर के चंदेल में एनएससीएन-के संगठन के नागा आतंकियों ने घात लगाकर इंडियन आर्मी के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद इंडियन आर्मी ने सीमा पार म्‍यांमार में सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया और आतंकियों को मार गिराया। इस सर्जिकल स्‍ट्राइक पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरें भी टिकी हुई थीं।इस सर्जिकल स्‍ट्राइक की जिम्‍मेदारी उस समय नागलैंड के दिमापुर स्थित 3 कॉर्प्‍स कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत पर थी।

पीओके की सर्जिकल स्‍ट्राइक और रावत

पीओके की सर्जिकल स्‍ट्राइक और रावत

साल 2016 में जब 18 सितंबर को जब उरी आतंकी हमला हुआ तो रावत वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ थे। सिर्फ तीन हफ्ते ही हुए थे जब उन्‍हें यह पद दिया गया था। इसके बाद पीओके में एक सर्जिकल स्‍ट्राइक हुई और इस बार रावत फिर से एक सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम देने वाली टीम का अहम हिस्‍सा थे। पीओके की सर्जिकल स्‍ट्राइक में अहम रोल डायरेक्‍टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) को वाइस चीफ को ही रिपोर्ट करना होता है और जब सर्जिकल स्‍ट्राइक हुई तो रावत साउथ ब्‍लॉक का नर्व सेंटर थे। वह एक बार फिर से एनएसए के साथ एक और सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दे रहे थे।

 तीसरे गोरखा आर्मी चीफ

तीसरे गोरखा आर्मी चीफ

जनरल बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका दिल्ली यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में ग्रेजुएट हैं। मधुलिका सोशल वर्कर हैं और खासकर कैंसर के मरीजों के लिए काम कर रही हैं। फील्‍ड मार्शल सैम मॉनकेशॉ और जनरल दलबीर सिंह सुहाग के बाद लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत तीसरे ऐसे सेना प्रमुख होंगे जो गोरखा रेजीमेंट से आते हैं। जनरल बिपिन रावत सुरक्षा मामलों पर लिखते भी रहे हैं और उनके आलेख देश के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।

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