PROFILE OF SHEILA DIKSHIT: 3 बार की सीएम रहीं शीला दीक्षित को 80 साल की उम्र में फिर मिली दिल्ली कांग्रेस की कमान
नई दिल्ली। 15 सालों तक दिल्ली की सत्ता पर बतौर मुख्यमंत्री राज करने वाली 80 वर्षीय शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) तीन बार लगातार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। अब उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के लिए तीन वर्किंग प्रेसीडेंट को भी नियुक्त किए हैं। 80 वर्षीय शीला के सियासी अनुभव का फायदा उठाने के साथ-साथ राज्य के ब्राह्मण वोटों को भी अपने पक्ष में करने की जुगत बैठाई है। ब्राह्मणों को अब तक परंपरागत रूप से बीजेपी का वोट बैंक माना जाता हैं।

पंजाब के कपूरथला में जन्मी थी शीला दीक्षित
शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। शीला की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के कान्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से ली। बाद में स्नातक और कला स्नातकोत्तर की शिक्षा मिरांडा हाउस कॉलेज से हासिल की। शीला का यूपी से गहरा संबंध रहा है। शीला का विवाह स्वाधीनता सेनानी तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रह चुके उमा शंकर दीक्षित के परिवार में हुआ था। उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था। शीला को कॉलेज के जमाने में विनोद दीक्षित से प्यार हुआ और जो शादी तक पहुंचा। शीलाजी एक बेटे और एक बेटी की मां हैं। उनके बेटे संदीप दीक्षित सांसद रह चुके हैं।

शीला दीक्षित ने वर्ष 1998 में कांग्रेस को दिल्ली में जीत दिलवाई
राजनीति में आने से पहले वे कई संगठनों से जुड़ी रही हैं और उन्होंने कामकाजी महिलाओं के लिए दिल्ली में दो हॉस्टल भी बनवाए। 1984 से 89 तक वे कन्नौज (उप्र) से सांसद रहीं। इस दौरान वे लोकसभा की समितियों में रहने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहीं। 1984 से 1989 तक में वे यूपी के कन्नौज से सांसद भी रह चुकी हैं। वे बाद में केन्द्रीय मंत्री भी रहीं। उनका दिल्ली शहर की महापौर से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर काफी शानदार माना जाता है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए शीला दीक्षित ने वर्ष 1998 में कांग्रेस को दिल्ली में जीत दिलवाई।

शीला पर लग चुके है कई गंभीर आरोप
शीला वर्ष 1998 से 2013 तक तीन कार्यकाल में दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद संभाल चुकी हैं। दिल्ली में मेट्रो और फ्लाईओवर को लंबा जाल उन्हीं के कार्यकाल की देन माना जाता हैं। सीएम के रूप में दिल्ली के विकास का श्रेय मिलने के साथ-साथ शीला और उनकी तत्कालीन सरकार पर विभिन्न घोटालों के आरोप भी लगते रहे हैं। कॉमनवेल्थ, टैंकर और मीटर घोटाले में उन पर गंभीर आरोप लगे हैं। यही नहीं उन पर जेसिका लाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी मनु शर्मा को पैरोल पर रिहा करने को लेकर भी आरोप लगे थे।












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