लोकसभा चुनाव 2019: बीदर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। कर्नाटक की बीदर लोकसभा सीट पर ज्यादातर मौकों पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता रहा है। लंबे समय तक यहां कांग्रेस काबिज रही तो 1990 के बाद यहां भाजपा का अच्छा प्रभाव रहा है। इस लोकसभा में भी भाजपा के भगवंत कुंभा यहां से सांसद हैं। 2014 के चुनाव में कुंभा ने मौजूदा सांसद कांग्रेस के धर्मसिंह को 92,222 वोटों से हराया था।

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50 साल के भगवंत कुंभा का संसद में प्रदर्शन की बात की जाए तो उनकी उपस्थिति 81 फीसदी रही है। उन्होंने 315 सवाल पूछे हैं और 15 डिबेट में हिस्सा लिया है। वहीं बीदर क्षेत्र की बात की जाए तो यहां की आबादी 22,36,250 है। इसमें 78 फीसदी ग्रामीण और 22 फीसदी शहरी लोग हैं। इस सीट पर 25 फीसदी एससी और 11 फीसदी एसटी समुदाय के लोगों की आबादी है। सीट पर कुल मतदाताओं की तादाद 16,00,962 है। 2014 में यहां 60 फीसदी लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था।

बीदर लोकसभा सीट का गठन 1962 में किया गया, इससे पहले ये क्षेत्र गुलबर्गा क्षेत्र में आती थी। जिसके बाद साल 2008 तक यह सीट अनुसूचित जाति के कैंडिडेट के लिए आरक्षित रही। बीदर जिला और गुलबर्गा जिले की दो विधानसभा सीटें इस लोकसभा क्षेत्र के अंदर आता है। इस सीट के तहत 8 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें दो एससी के लिए रिजर्व हैं। साल 1962 से लेकर 1989 तक हुए सात चुनावों में कांग्रेस को जीत हासिल होती रही। इसके बाद 1991 से लेकर 1999 तक हुए पांच चुनावों में यहां भाजपा जीती। इसके बाद 2004 में हुई उप-चुनावों में कांग्रेस से एन.एच. सूर्यवंशी ने जीत हासिल की। इसके बाद 2009 के आम चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार धर्म सिंह को जीत मिली। 2014 में यहां फिर से भाजपा को जीत मिली। इस सीट पर कांग्रेस 10 बार तो भाजपा छह बार जीती है।

इस सीट पर सबसे ज्यादा सात बार रामचंद्र वीरप्पा सांसद रहे, वो दो बार कांग्रेस और पांच बार भाजपा से चुने गए। वहीं कांग्रेस के नरसिंह राव सूर्यवंशी चार बार इस सीट से जीते हैं। 1962 और 1967 में कांग्रेस के रामचंद्र वीरप्पा यहां से जीचे। 1971 और 77 में कांग्रेस के ही शंकर देव बालाजी चुने गए। 1980, 84 और 89 के चुनाव में नरसिंह राव यहां से चुने गए। 1991 से 2004 तक लगातार पांच बार रामचंद्र वीरप्पा भाजपा के टिकट पर जीते। 2004 में ही वीरप्पा के देहांत के बादहुए उपचुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के नरसिंह ने चुनाव जीता। 2009 में कांग्रेस के धर्मसिंह यहां से चुने गए। 2014 मे धर्मसिंह को हरा भाजपा के भगवंत कुंभा एमपी बने।

हैदराबाद से 140 किमी दूर, बीदर कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित शहर है। यह मंजीरा नदी घाटी के नजदीक डेक्कन पठार पर 2,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। बीदर प्रसिद्ध कर्नाटक पर्यटक स्थानों में से एक है। और यह अपने बीदर का किला के लिए जाना जाता है। बीदर पूर्वी तरफ तेलंगाना के निजामाबाद और मेदक जिलों, पश्चिमी तरफ महाराष्ट्र के लातूर और उस्मानाबाद जिलों, उत्तरी तरफ महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले और दक्षिणी तरफ गुलबर्गा जिले से घिरा हुआ है।

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